मुंबई तरबूज मौत मामला सुलझा: जानिए चार सदस्यीय परिवार की मौत की असली वजह क्या थी
मुंबई के पायधोनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत का मामला आखिरकार सुलझ गया है। अधिकारियों ने गुरुवार को पुष्टि की कि परिवार की मौत तरबूज खाने से नहीं, बल्कि जिंक फॉस्फाइड नामक बेहद जहरीले चूहे मारने वाले जहर के कारण..
मुंबई के पायधोनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत का मामला आखिरकार सुलझ गया है। अधिकारियों ने गुरुवार को पुष्टि की कि परिवार की मौत तरबूज खाने से नहीं, बल्कि जिंक फॉस्फाइड नामक बेहद जहरीले चूहे मारने वाले जहर के कारण हुई थी।
अधिकारियों के मुताबिक, फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने अब्दुल्ला दोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन और उनकी बेटियों आयशा तथा ज़ैनब के विसरा नमूनों की जांच की। जांच में जिंक फॉस्फाइड के स्पष्ट अंश पाए गए। यह रसायन आमतौर पर चूहों और चूहियों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और बहुत कम मात्रा में भी बेहद घातक माना जाता है।
इस दर्दनाक घटना के बाद शुरू में अटकलें लगाई जा रही थीं कि परिवार देर रात तरबूज खाने के बाद बीमार पड़ा था। लेकिन अब जांच एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि तरबूज मौत की वजह नहीं था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जहर गलती से खाया गया या जानबूझकर। जांचकर्ताओं को अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह संकेत मिले कि परिवार ने कोई आत्मघाती कदम उठाने की योजना बनाई थी। मामले की जांच फिलहाल जेजे मार्ग पुलिस स्टेशन कर रहा है, जिसने परिवार के रिश्तेदारों, पड़ोसियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
दक्षिण मुंबई के इस्माइल कुर्ते रोड स्थित घारी मोहल्ला में रहने वाले दोकाडिया परिवार ने 25 अप्रैल की रात एक पारिवारिक समारोह आयोजित किया था। समारोह में शामिल रिश्तेदारों को बिरयानी परोसी गई थी। मेहमानों के जाने के बाद परिवार ने रात करीब 1 बजे तरबूज खाया।
इसके कुछ घंटों बाद, 26 अप्रैल की सुबह करीब 5 बजे परिवार के चारों सदस्यों को तेज उल्टी, दस्त और गंभीर बेचैनी की शिकायत होने लगी। उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद रिश्तेदार उन्हें नजदीकी अस्पताल ले गए। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान चारों की मौत हो गई।
इन मौतों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही थी। अब फॉरेंसिक रिपोर्ट में चूहे मारने वाले जहर की पुष्टि होने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीला पदार्थ परिवार के खाने में कैसे पहुंचा।
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायनों और चूहे मार दवाओं के सुरक्षित भंडारण और सावधानीपूर्वक इस्तेमाल की कितनी आवश्यकता है।
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