नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली का भारत पर परोक्ष हमला, चीन समझौतों का किया जिक्र, कहा—“संप्रभुता पर खतरा”
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए भारत पर अप्रत्यक्ष हमला बोला और चीन से किए गए समझौतों का जिक्र किया। संविधान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को फेसबुक पोस्ट में ओली ने 2015 में लगे नाकेबंदी का हवाला देते हुए कहा कि यह नेपाल की संप्रभुता और विदेश नीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित..
काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए भारत पर अप्रत्यक्ष हमला बोला और चीन से किए गए समझौतों का जिक्र किया। संविधान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को फेसबुक पोस्ट में ओली ने 2015 में लगे नाकेबंदी का हवाला देते हुए कहा कि यह नेपाल की संप्रभुता और विदेश नीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
उन्होंने लिखा, “संविधान नाकेबंदी और संप्रभुता पर आए संकट को पार करते हुए जारी किया गया। इसके बाद उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाले परिवहन ढांचे तैयार किए गए ताकि कोई भी नेपाल को अवरुद्ध न कर सके।” ओली ने चीन के साथ 2016 में हुए ट्रांजिट और ट्रांसपोर्ट समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे नेपाल ने अपनी स्वतंत्रता की क्षमता को बढ़ाया और एकतरफा निर्भरता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
पूर्व प्रधानमंत्री ने हालिया युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर भी टिप्पणी की, जिनकी वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन में “षड्यंत्रकारियों” ने घुसपैठ कर हिंसा को भड़काया, जिससे कई युवाओं की जान गई। ओली ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी सरकार के आदेश पर नहीं हुई और इसमें ऐसे हथियारों का इस्तेमाल हुआ जो पुलिस के पास नहीं होते।
ओली ने देश में हुई तोड़फोड़ को गहरी साजिश करार देते हुए कहा, “मेरे इस्तीफे के बाद सिंहदरबार को जलाया गया, नेपाल का नक्शा जलाया गया, राष्ट्रीय प्रतीकों को निशाना बनाया गया। जनप्रतिनिधि संस्थाओं, अदालतों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और राजनीतिक दलों के दफ्तरों तक को नहीं छोड़ा गया।”
भारत का नाम लिए बिना उन्होंने 2015 की नाकेबंदी को याद करते हुए कहा कि उस समय नेपाल की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी और उसी अनुभव से देश ने वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू किए।
अपने संदेश में ओली ने युवाओं से अपील की कि वे “भ्रामक कथाओं” से बचें और सच्चाई को समय के साथ खुद समझें। उन्होंने कहा, “हम सब पीढ़ियों के नेपाली एकजुट होकर संप्रभुता और संविधान की रक्षा करें। अगर समय रहते यह नहीं समझा गया तो हमारी संप्रभुता केवल इतिहास में रह जाएगी।”
ओली के बयान की मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री का बयान: सत्ता से हटने के बाद के.पी. शर्मा ओली का पहला सार्वजनिक बयान।
भारत पर परोक्ष हमला: 2015 की नाकेबंदी का जिक्र, कहा – यह नेपाल की संप्रभुता और विदेश नीति का निर्णायक मोड़ था।
चीन का सहारा: 2016 में चीन के साथ ट्रांजिट और ट्रांसपोर्ट समझौते का उल्लेख, निर्भरता घटाने और संप्रभुता मजबूत करने की बात।
युवा प्रदर्शनों पर टिप्पणी: शांतिपूर्ण आंदोलन में षड्यंत्रकारियों की घुसपैठ का आरोप, हिंसा और युवाओं की मौत को साजिश बताया।
गोलीबारी पर सवाल: दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर गोली सरकार के आदेश से नहीं चली, इसमें ऐसे हथियार इस्तेमाल हुए जो पुलिस के पास नहीं।
राष्ट्रीय प्रतीकों पर हमला: इस्तीफे के बाद सिंहदरबार, नेपाल का नक्शा और संस्थाओं को निशाना बनाए जाने को गहरी साजिश करार दिया।
युवाओं को संदेश: भ्रामक कथाओं से बचने और सच्चाई को समय के साथ समझने की अपील।
संविधान और संप्रभुता पर जोर: कहा – “सभी पीढ़ियों के नेपाली एकजुट होकर संविधान और संप्रभुता की रक्षा करें, वरना यह केवल इतिहास में रह जाएगी।”
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