कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विवाद गहराया.. लिपुलेख मार्ग पर नेपाल की आपत्ति
नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और चीन के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं और इस मार्ग से किसी भी प्रकार की गतिविधि..
नयी दिल्ली/काठमांडू। नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारत और चीन के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं और इस मार्ग से किसी भी प्रकार की गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी।
नेपाल के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि महाकाली नदी के पूर्व स्थित ये क्षेत्र 1816 की सुगौली संधि के आधार पर नेपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सरकार ने इस मुद्दे पर भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक माध्यमों से अपनी स्थिति से अवगत करा दिया है।
उधर, भारत का विदेश मंत्रालय हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जून से अगस्त 2026 के बीच यात्रा आयोजित करने की तैयारी में है। मंत्रालय के अनुसार, कुल 20 बैचों में यात्रा कराई जाएगी, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 यात्री शामिल होंगे। इनमें से 10 दल उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से तथा शेष 10 दल सिक्किम के नाथू ला दर्रे से यात्रा करेंगे।
नेपाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसने पहले भी भारत से इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, सीमा व्यापार और तीर्थ यात्रा जैसी गतिविधियों से परहेज करने का अनुरोध किया था। साथ ही, चीन को भी इस क्षेत्र पर अपने दावे की जानकारी दी गई है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इच्छुक यात्री आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 19 मई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित, निष्पक्ष और संतुलित होगी।
गौरतलब है कि लिपुलेख दर्रा वर्तमान में भारत द्वारा उत्तराखंड के अंतर्गत प्रशासित किया जाता है, जबकि नेपाल इस पर अपना दावा करता रहा है। ऐसे में धार्मिक यात्रा के साथ जुड़ा यह मुद्दा एक बार फिर दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक विषय बन गया है।
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