श्रृंगेरी पुनर्गणना विवाद: डीके शिवकुमार ने बताया ‘राष्ट्र के लिए शर्मनाक’, लोकतंत्र के विरुद्ध ‘संगठित अपराध’
कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचाने वाले श्रींगेरी विधानसभा सीट विवाद पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “राष्ट्र के लिए शर्मनाक” और लोकतंत्र के विरुद्ध “संगठित अपराध” करार दिया..
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में हलचल मचाने वाले श्रींगेरी विधानसभा सीट विवाद पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “राष्ट्र के लिए शर्मनाक” और लोकतंत्र के विरुद्ध “संगठित अपराध” करार दिया है। यह विवाद रविवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब अदालत के आदेश पर डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की पुनर्गणना पूरी हुई। दिलचस्प बात यह रही कि तमाम आरोपों के बावजूद कांग्रेस विधायक की जीत का अंतर उल्टा बढ़ गया।
2023 चुनाव विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस के टी डी राजेगौड़ा ने भाजपा के डी एन जीवेराज को बेहद मामूली अंतर से हराया था। शुरुआती नतीजों में जीत का अंतर सिर्फ 201 वोट था, जबकि 279 पोस्टल बैलेट खारिज कर दिए गए थे।
शिवकुमार की तीखी प्रतिक्रिया
शिवकुमार ने अपने सादाशिवनगर आवास और होस्पेट में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “मैंने नहीं सोचा था कि वे इस स्तर तक गिर जाएंगे। रिपोर्ट है कि पूर्व विधायक डीएन जीवेराज ने अधिकारियों का दुरुपयोग कर पोस्टल बैलेट में गड़बड़ी की। मतगणना के बाद सभी एजेंट्स और अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे, इसके बाद यह सब हुआ। यह देश और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।”
उन्होंने आगे कहा कि सभी राजनीतिक दलों को सतर्क रहने की जरूरत है और इस मामले में गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम हर कानूनी और न्यायिक रास्ते से लड़ाई लड़ेंगे। जयनगर सीट पर भी इसी तरह का अन्याय हुआ है।”
हाईकोर्ट का आदेश और पुनर्गणना
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में इस मामले में पुनर्गणना का आदेश दिया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 6 अप्रैल 2026 को यह फैसला आया।
पुनर्गणना के बाद कांग्रेस विधायक टी डी राजेगौड़ा की जीत का अंतर 201 से बढ़कर 203 वोट हो गया।
छेड़छाड़ के आरोप और उलझे आंकड़े
हालांकि, पुनर्गणना प्रक्रिया के दौरान छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए। कांग्रेस एजेंट्स का कहना है कि स्ट्रॉन्ग रूम में रखे बैलेट बॉक्स के ताले और सील संदिग्ध हालत में पाए गए।
पुन: सत्यापन के दौरान..
- पहले राजेगौड़ा के पक्ष में गिने गए 255 पोस्टल बैलेट अमान्य घोषित कर दिए गए
- जीवेराज के पोस्टल वोट 692 से घटकर 690 हो गए
- राजेगौड़ा के पोस्टल वोट 569 से घटकर 314 रह गए
इन आंकड़ों के बाद स्थिति उलझ गई और पुनर्गणना के अनुसार राजेगौड़ा 52 वोट से पीछे बताए गए।
अब भारत निर्वाचन आयोग सीलबंद रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और उसके बाद ही अंतिम आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
निष्कर्ष
श्रृंगेरी सीट का यह विवाद न केवल कानूनी लड़ाई बन गया है, बल्कि इसने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में अदालत और चुनाव आयोग के फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे।
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