नयी दिल्ली ने खरीद बंद कर दी है’: ट्रंप की 500% टैरिफ धमकी के बाद रूसी तेल पर भारत को लेकर अमेरिकी वित्त मंत्री का बड़ा बयान
रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ और वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी के बाद अमेरिका और भारत के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल रूसी तेल से जुड़े टैरिफ लागू किए हैं बल्कि उन्होंने एक द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक (Russia Sanctions Bill) को भी हरी झंडी दे दी है। यह विधेयक भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए..
रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ और वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी के बाद अमेरिका और भारत के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल रूसी तेल से जुड़े टैरिफ लागू किए हैं बल्कि उन्होंने एक द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक (Russia Sanctions Bill) को भी हरी झंडी दे दी है। यह विधेयक भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए है ताकि वे रूस से तेल खरीदना बंद करें, और उन देशों को सज़ा दी जा सके जो कथित तौर पर “पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं।”
क्या वॉशिंगटन भारत पर दबाव कम और चीन पर शिकंजा कस रहा है?
अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया यह विधेयक “Sanctioning of Russia Act 2025” कहलाता है। इसके तहत कई प्रावधान शामिल हैं, जिनमें अमेरिका द्वारा रूस से आयात होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500% तक शुल्क (ड्यूटी) लगाने का प्रावधान भी है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि इस बार यह टैरिफ धमकी भारत से ज़्यादा चीन को निशाना बनाकर दी गई है।
भारत को लेकर क्या कहा अमेरिकी वित्त मंत्री ने?
भारत की स्थिति पर बात करते हुए स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा रूसी तेल पर 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि नया अमेरिकी क़ानून, जिसे Russia Sanctions Act कहा जा रहा है, अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगा सके। इस विधेयक को राष्ट्रपति ने इस महीने की शुरुआत में मंज़ूरी दे दी है।
क्या ट्रंप को 500% टैरिफ लगाने के लिए सीनेट की मंज़ूरी चाहिए?
एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा, “रूसी तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने सीनेट के सामने रखा है और हम देखेंगे कि वह पास होता है या नहीं। लेकिन हमारा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इसके लिए अलग से अधिकार की ज़रूरत नहीं है। वह इसे IEPA (International Emergency Powers Act) के तहत लागू कर सकते हैं, हालांकि सीनेट उन्हें यह अधिकार औपचारिक रूप से देना चाहती है।”
व्हाइट हाउस का बयान: यूरोप और चीन पर भी निशाना
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यूरोप अब भी रूस से तेल खरीद रहा है और इस तरह वह “अपने ही खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद रोक दी है, जबकि चीन, जो रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है, अब अमेरिका के निशाने पर है।
प्रवक्ता ने कहा, “चार साल बाद भी यूरोप रूस से तेल खरीद रहा है और खुद के खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है। भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने उन पर 25% टैरिफ लगाया, जिसके बाद भारत ने खरीद कम कर दी और अब पूरी तरह बंद कर दी है।”
रूस प्रतिबंध विधेयक को ट्रंप की मंज़ूरी
एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा, “आज राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कई मुद्दों पर बेहद उपयोगी बैठक हुई। उन्होंने उस द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं सीनेटर ब्लूमेंटल और अन्य सहयोगियों के साथ महीनों से काम कर रहा था। यह सही समय पर आया है, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है और पुतिन केवल बातें कर रहे हैं, जबकि निर्दोष लोगों की हत्या जारी है। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सज़ा देने का अधिकार देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं।”
ट्रंप की ताज़ा टैरिफ धमकी का मुख्य निशाना चीन क्यों?
ग्राहम ने आगे कहा, “यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राज़ील जैसे देशों पर जबरदस्त दबाव बनाने का हथियार देगा, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें, जिससे यूक्रेन में पुतिन की हिंसा को फंडिंग मिल रही है। मुझे उम्मीद है कि अगले हफ्ते ही इस पर मज़बूत द्विदलीय समर्थन मिलेगा।”
भारत की प्रतिक्रिया
प्रस्तावित विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस विधेयक से अवगत है और घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए है।
उन्होंने कहा, “हम प्रस्तावित विधेयक से अवगत हैं और घटनाक्रम पर क़रीबी नज़र रखे हुए हैं।”
भारत की ऊर्जा नीति पर अपनी पुरानी स्थिति दोहराते हुए जायसवाल ने कहा कि भारत के फैसले ऊर्जा सुरक्षा और बाज़ार की वास्तविकताओं पर आधारित हैं। उन्होंने कहा,
गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि कम से कम 85 अमेरिकी सीनेटर राष्ट्रपति ट्रंप को यह अधिकार देने के पक्ष में थे कि वह चीन द्वारा रूसी तेल खरीदने पर 500% तक टैरिफ लगा सकें।
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