राजीव गांधी फाउंडेशन को ओडिशा पुलिस का नोटिस, विदेशी चंदे का ब्योरा मांगा
ओडिशा पुलिस ने रविवार को राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) को नोटिस जारी कर उसकी वित्तीय जानकारी और विदेशी योगदान का ब्योरा मांगा है। यह कदम झारसुगुड़ा में इस साल की शुरुआत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले से जुड़ा है, जिसमें उन पर “राष्ट्रविरोधी” बयान देने का आरोप..
भुवनेश्वर। ओडिशा पुलिस ने रविवार को राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) को नोटिस जारी कर उसकी वित्तीय जानकारी और विदेशी योगदान का ब्योरा मांगा है। यह कदम झारसुगुड़ा में इस साल की शुरुआत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले से जुड़ा है, जिसमें उन पर “राष्ट्रविरोधी” बयान देने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, नोटिस BNSS की धारा 94 के तहत जारी किया गया है। फाउंडेशन के निदेशक को पुलिस ने तलब भी किया है।
पुलिस ने जिन दस्तावेजों की मांग की है, उनमें शामिल हैं –
- 1991 में फाउंडेशन की स्थापना से अब तक हर साल का विदेशी चंदे का ब्योरा,
- बैंक खातों का विवरण,
- अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की जानकारी,
- लेखा परीक्षकों (ऑडिटर्स) के नाम व संपर्क,
- FCRA लाइसेंस की प्रति,
- विशेष दान को लेकर स्पष्टीकरण।
झारसुगुड़ा पुलिस ने खासतौर पर पूछा है कि क्या फाउंडेशन को विवादित उपदेशक जाकिर नाइक और चीनी सरकार से विदेशी दान प्राप्त हुआ है।
इसके अलावा यूपीए शासनकाल के दौरान प्रधानमंत्री राहत कोष के कथित दुरुपयोग पर भी सफाई मांगी गई है।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “यदि नोटिस का पालन नहीं किया गया, तो BNSS की धारा 210 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।”
गौरतलब है कि इस साल 7 फरवरी को झारसुगुड़ा में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
यह शिकायत 15 जनवरी को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान दिए गए उनके भाषण के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसमें राहुल ने कहा था, “हम अब बीजेपी, आरएसएस और भारतीय राज्य (Indian State) के खिलाफ लड़ रहे हैं।” स्थानीय भाजपा इकाइयों और संबद्ध संगठनों ने आरोप लगाया था कि राहुल के बयान से विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा मिला और भारत की संप्रभुता कमजोर हुई।
नॉर्दर्न रेंज के आईजी हिमांशु लाल ने कहा, “पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर काम कर रही है। जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।”
यह मामला खास है क्योंकि यह BNSS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत दर्ज शुरुआती हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक है। जुलाई 2024 में BNSS ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली थी और अब राष्ट्रीय सुरक्षा व सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों की कार्यवाही इसी के तहत होती है।
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