ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का रूस पर दबाव: S-400 की जल्द डिलीवरी और Su-30MKI अपग्रेड की मांग
भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष इकाइयों की जल्द डिलीवरी और Sukhoi-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन की मांग की है। यह वार्ता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसव के बीच चीन के चिंगदाओ
नयी दिल्ली। भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष इकाइयों की तेज डिलीवरी और Sukhoi-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन की मांग की है। यह वार्ता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसव के बीच चीन के चिंगदाओ शहर में हुई, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेने पहुंचे थे।
बैठक के मुख्य बिंदु
- S-400 वायु रक्षा प्रणाली की डिलीवरी में तेजी
- Su-30MKI लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण
- महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की त्वरित आपूर्ति पर चर्चा
ऑपरेशन सिंदूर की भूमिका
- 7 मई, 2025 को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर गुप्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था।
- पाकिस्तान ने इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत के सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हवाई हमले की कोशिश की थी।
- भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की सभी हमलावर कोशिशों को नाकाम कर दिया, जिससे इन प्रणालियों की रणनीतिक अहमियत साबित हुई।
S-400: अब तक की स्थिति
- भारत ने 2018 में रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर (करीब ₹40,000 करोड़) में 5 S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का करार किया था।
- अब तक 3 स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं, जिन्हें उत्तर-पश्चिम और पूर्वी सेक्टर में तैनात किया गया है, खासकर पाकिस्तान और चीन से संभावित खतरों को देखते हुए।
- रूस ने आश्वासन दिया है कि शेष 2 स्क्वाड्रन की आपूर्ति अगस्त 2026 तक पूरी कर दी जाएगी।
- हर S-400 स्क्वाड्रन में 2 बैटरियां होती हैं, जिनमें कुल 128 मिसाइलें लदी होती हैं।
Su-30MKI फ्लीट का अपग्रेड
- भारत के पास वर्तमान में 260 Su-30MKI लड़ाकू विमान हैं, जो भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाते हैं।
- अब भारत इन विमानों को उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस करना चाहता है।
- यह अपग्रेडेशन पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं से बढ़ते खतरों को देखते हुए और भी जरूरी हो गया है, खासकर मई 2025 के बाद।
रक्षा रणनीति और भू-राजनीतिक संकेत
- यह बैठक ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजनाथ सिंह की पहली विदेश यात्रा थी, जिससे संकेत मिलता है कि भारत अब रूस से रक्षा आपूर्ति के मामलों में और अधिक तत्परता चाहता है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते S-400 की डिलीवरी पहले ही देरी का शिकार हो चुकी है। अब भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि रूस कोई और विलंब न करे।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अपने रक्षा ढांचे को और मजबूत करने की तत्काल जरूरत है। रूस के साथ हुई यह बैठक इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत की हवाई श्रेष्ठता और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली को और उन्नत किया जा सके। S-400 की डिलीवरी में तेजी और Su-30MKI विमानों का अपग्रेड भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।
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