मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की नई कोशिश में जुटा विपक्ष

पूर्व में दिए गए नोटिस खारिज होने के बावजूद, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पद से हटाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। शनिवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष इस मुद्दे पर फिर से पहल करने की तैयारी में..

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की नई कोशिश में जुटा विपक्ष
20-04-2026 - 08:28 AM

नयी दिल्ली। पूर्व में दिए गए नोटिस खारिज होने के बावजूद, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पद से हटाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। शनिवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष इस मुद्दे पर फिर से पहल करने की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित विभिन्न दलों के कम से कम पांच वरिष्ठ सांसद नए नोटिस का मसौदा तैयार करने के लिए आपसी चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, यह अभी तय नहीं है कि यह नोटिस लोकसभा, राज्यसभा या दोनों सदनों में पेश किया जाएगा, जैसा कि पहले प्रयास में किया गया था।

हाल ही में The Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 के लोकसभा में खारिज होने के बाद विपक्षी नेता अधिक समर्थन जुटाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। उनका लक्ष्य कम से कम 200 सांसदों के हस्ताक्षर हासिल करना है। एक सूत्र ने कहा, “हम एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं। पहला कदम यह दिखाना है कि पिछली बार समर्थन कम आंका गया था।”

अपने पहले प्रयास में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संवैधानिक स्वतंत्रता बनाए रखने में विफल रहने और कार्यपालिका के प्रभाव में काम करने के आरोप लगाए थे। आरोपों में ‘सिद्ध कदाचार’ (proved misbehaviour) का हवाला देते हुए कहा गया कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव में हुई, उन्होंने विपक्षी नेताओं के प्रति कथित रूप से ‘चरणबद्ध प्रतिक्रिया’ (graded response) अपनाई, चुनावी धांधली की जांच में बाधा डाली और डेटा साझा करने से इनकार कर पारदर्शिता की कमी दिखाई।

इसके अलावा, बिहार और अन्य क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियानों के जरिए व्यापक मताधिकार से वंचित करने, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने और राजनीतिक कार्यपालिका के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से समझौता करने के भी आरोप लगाए गए।

हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष Om Birla और राज्यसभा के सभापति C P Radhakrishnan ने पहले दिए गए नोटिस खारिज कर दिए थे। उनका कहना था कि भले ही आरोप सही मान लिए जाएं, वे ‘कदाचार’ की उस संवैधानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते, जो किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए आवश्यक होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति से जुड़े मुद्दे या पूर्व सरकारी भूमिकाएं कदाचार नहीं मानी जा सकतीं; सार्वजनिक बयानों या प्रशासनिक फैसलों में मतभेद, जानबूझकर सत्ता के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं होते; और डेटा साझा करना या मतदाता सूची में संशोधन जैसे कदम चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिनकी न्यायिक समीक्षा भी संभव है।

अध्यक्षों ने यह भी रेखांकित किया कि कई आरोप या तो अनुमान पर आधारित हैं, या राजनीतिक व्याख्या का परिणाम हैं, या फिर न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में केवल असहमति या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए स्पष्ट, ठोस और प्रमाणित कदाचार आवश्यक है जो इस मामले में मौजूद नहीं पाया गया।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।