‘पहलगाम हमले से वैश्विक छवि सुधरी’..LeT आतंकी के बयान से पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए 2025 के आतंकी हमले को लेकर एक वायरल वीडियो ने पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba (LeT) के एक शीर्ष कमांडर Abu Musa Kashmiri कथित तौर पर यह कहते सुने जा सकते हैं कि इस हमले से पाकिस्तान की वैश्विक छवि मजबूत..
जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए 2025 के आतंकी हमले को लेकर एक वायरल वीडियो ने पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba (LeT) के एक शीर्ष कमांडर Abu Musa Kashmiri कथित तौर पर यह कहते सुने जा सकते हैं कि इस हमले से पाकिस्तान की वैश्विक छवि मजबूत हुई।
वीडियो में वह कहते हैं, “पहलगाम हमले सही थे या गलत, यह मैं नहीं जानता, लेकिन इसके बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि बेहतर हुई… इसने देश को 50 साल आगे बढ़ा दिया।” उन्होंने “बुनयान-उन-मारसूस” नामक कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिसे भारत की कार्रवाई के जवाब के रूप में बताया गया।
पाकिस्तान की ‘शांतिदूत’ छवि पर सवाल
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब Pakistan खुद को वैश्विक मंच पर शांति स्थापित करने वाला देश दिखाने की कोशिश कर रहा है और United States व Iran के बीच संघर्षविराम वार्ता की मेजबानी कर रहा है।
हालांकि, इस वीडियो ने पाकिस्तान के उस रुख को कमजोर किया है जिसमें वह लगातार पहलगाम हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान ने पहले भारत के आरोपों को “मनगढ़ंत” बताया था और कहा था कि भारत ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा है।
भारत का रुख
हमले के बाद India ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को “आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश” करार देते हुए उसके खिलाफ अभियान चलाया और उसके आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के इतिहास को उजागर किया।
पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने Operation Sindoor शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया, जिनमें Yusuf Azhar, Abdul Malik Rauf और Mudasir Ahmed जैसे बड़े नाम शामिल बताए गए।
सैन्य तनाव और संघर्षविराम
इस कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था। अंततः 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ (Director General of Military Operations) के बीच बातचीत के बाद जमीन, हवा और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
निष्कर्ष
LeT कमांडर का यह कथित बयान न केवल पाकिस्तान के आधिकारिक दावों के विपरीत जाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब वह खुद को शांति वार्ता का मध्यस्थ दिखाने की कोशिश कर रहा है।
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