पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा, JD वेंस की ‘फाइनल ऑफर’ के बावजूद परमाणु गतिरोध कायम
पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में हुई अमेरिका-ईरान के बीच लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने 15 घंटे चली मैराथन वार्ता के बाद घोषणा की कि दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना समझौते के..
पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में हुई अमेरिका-ईरान के बीच लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने 15 घंटे चली मैराथन वार्ता के बाद घोषणा की कि दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना समझौते के लौट रहा है।
वेंस ने वार्ता विफल होने के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि United States को तेहरान की ओर से यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) रोकने की पर्याप्त इच्छा नहीं दिखी। अमेरिका चाहता है कि Iran स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
वेंस ने कहा कि अमेरिका बातचीत में लचीला रहा, लेकिन अब उसने अपनी “अंतिम पेशकश” (final offer) दे दी है। उन्होंने कहा, “हम यहां एक सरल प्रस्ताव छोड़कर जा रहे हैं—यह हमारी अंतिम और सर्वश्रेष्ठ पेशकश है। अब देखना है कि ईरान इसे स्वीकार करता है या नहीं।”
क्या रहा मुख्य विवाद?
इस वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रहा। वेंस के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल परमाणु हथियार न बनाए, बल्कि उन तकनीकी साधनों से भी दूर रहे, जिनसे वह तेजी से परमाणु हथियार बना सकता है।
वेंस ने यह भी बताया कि वार्ता के दौरान उनकी लगातार संपर्क में Donald Trump सहित अमेरिकी प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी रहे, जिनमें Marco Rubio, Pete Hegseth, Scott Bessent और Brad Cooper शामिल हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की सरकारी एजेंसी Tasnim News Agency ने अमेरिकी रुख को वार्ता विफल होने का कारण बताया। एजेंसी के अनुसार, “अमेरिका की अत्यधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण समझौता नहीं हो सका।”
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कूटनीति अभी भी उसकी रणनीति का केंद्र है। वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, प्रतिबंधों में राहत, युद्ध मुआवजा और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दूसरा पक्ष कितनी गंभीरता, ईमानदारी और संतुलित रवैया अपनाता है, साथ ही ईरान के वैध अधिकारों और हितों को स्वीकार करता है।
ट्रंप का बयान
वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा था कि समझौता हो या न हो, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उनका दावा था कि अमेरिका युद्ध में पहले ही बढ़त हासिल कर चुका है।
निष्कर्ष
इस्लामाबाद में हुई ये अहम वार्ता फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है, जिससे निकट भविष्य में समझौते की संभावनाएं अनिश्चित नजर आ रही हैं।
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