वसुंधरा राजे के बयान से राजस्थान में सियासी घमासान, मदन राठौड़ का पलटवार
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक हालिया बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मनोहर थाना में आयोजित एक जनसभा के दौरान उनके शब्दों ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग छेड़ दी..
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक हालिया बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मनोहर थाना में आयोजित एक जनसभा के दौरान उनके शब्दों ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग छेड़ दी है।
क्या कहा वसुंधरा राजे ने?
जनसंपर्क अभियान के दौरान जनता को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा,
“आपका प्यार और विश्वास बना रहे। छोटी-मोटी समस्याएं तो रहती ही हैं। कोई अपना घर नहीं बना पा रहा, किसी को मुआवजा नहीं मिला… मैंने भी ऐसे हालात देखे हैं। मैं अपने लिए भी कुछ नहीं कर पाई, मैंने सब कुछ खो दिया। मैं खुद को भी नहीं बचा पाई।”
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या राजे अपने मुख्यमंत्री न होने के दर्द को जाहिर कर रही हैं।
मदन राठौड़ का मारवाड़ी अंदाज में जवाब
इस बयान पर मदन राठौड़ ने बीकानेर में प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“वसुंधरा जी के सारे काम हो रहे हैं, फिर वो खुद को कैसे नहीं बचा पाईं? एक ही व्यक्ति हमेशा मुख्यमंत्री नहीं रह सकता।”
उन्होंने अपने बयान को और तीखा बनाते हुए एक मारवाड़ी दोहा भी सुनाया—
“चिट्ठी (रोटी) चूर-चूर करे, मांगे दाल और घी,
मोदी से कौन झगड़ा करे, चिट्ठी खाने नाल।”
राठौड़ ने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि जो उपलब्ध है, उसे स्वीकार करना चाहिए और नरेंद्र मोदी से मुकाबला करना संभव नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान एक बड़ा सियासी संदेश देता है।
अखिलेश और गहलोत का राजे को समर्थन
इस विवाद के बीच अखिलेश यादव ने जयपुर दौरे के दौरान वसुंधरा राजे का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “अगर वसुंधरा जी मुख्यमंत्री होतीं, तो शायद बेहतर काम होता।”
वहीं अशोक गहलोत ने भी इस बात से सहमति जताई, जिससे भाजपा के अंदरूनी मतभेद और उभरकर सामने आए।
वसुंधरा राजे की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद वसुंधरा राजे ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया।
राजे ने स्पष्ट किया, “धौलपुर में मेरे घर के सामने जब नेशनल हाईवे बना, तो मुझे अपनी बाउंड्री वॉल पीछे करनी पड़ी। नियमों के चलते मैं अपना घर भी नहीं बचा पाई। मैंने इसी उदाहरण के जरिए समझाया कि जब मैं अपना घर नहीं बचा सकी, तो किसी और का कैसे बचा सकती हूं?”
उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए कोई पद जनता के प्यार से बड़ा नहीं है और उनके बयान को विपक्ष द्वारा जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
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