LPG का विकल्प बन सकता है नया सिंथेटिक गैस DME, पुणे के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज

भारत की रसोई गैस (LPG) के आयात पर भारी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। CSIR–National Chemical Laboratory (CSIR-NCL), पुणे के वैज्ञानिकों ने एक स्वदेशी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए डाइमेथाइल ईथर (DME) नामक सिंथेटिक गैस तैयार की जा सकती है। यह गैस भविष्य में LPG का विकल्प बन सकती..

LPG का विकल्प बन सकता है नया सिंथेटिक गैस DME, पुणे के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
17-03-2026 - 09:08 AM

नयी दिल्ली। भारत की रसोई गैस (LPG) के आयात पर भारी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। CSIR–National Chemical Laboratory (CSIR-NCL), पुणे के वैज्ञानिकों ने एक स्वदेशी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए डाइमेथाइल ईथर (DME) नामक सिंथेटिक गैस तैयार की जा सकती है। यह गैस भविष्य में LPG का विकल्प बन सकती है और भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

संस्थान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह तकनीक पेटेंट-संरक्षित है और देश की आयातित LPG पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

साफ और कम प्रदूषण वाला ईंधन

डाइमेथाइल ईथर को स्वच्छ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके जलने पर

  • कालिख (Soot)
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx)
  • सल्फर ऑक्साइड (SOx)
  • और सूक्ष्म कण (Particulate Matter)

की मात्रा पारंपरिक ईंधनों की तुलना में काफी कम निकलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी ऊष्मीय क्षमता (Thermal efficiency) LPG के बराबर है।

LPG में मिलाया जा सकेगा DME

Bureau of Indian Standards (BIS) ने पहले ही इसके उपयोग के लिए मानक तय कर दिए हैं। IS 18698:2024 के अनुसार घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए LPG में 20 प्रतिशत तक DME मिलाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक LPG में 8 प्रतिशत तक DME मिलाने के लिए मौजूदा गैस सिलेंडर, रेगुलेटर, पाइप या चूल्हे में किसी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी यानी घरों में मौजूदा रसोई व्यवस्था के साथ ही इसका इस्तेमाल संभव होगा।

आयात बिल में बड़ी बचत संभव

भारत अपनी कुल जीवाश्म ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। वर्ष 2024 में देश ने करीब 21 मिलियन टन LPG आयात की थी।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि LPG की खपत में सिर्फ 8 प्रतिशत DME से प्रतिस्थापन किया जाए तो हर साल लगभग 9,500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

उज्ज्वला योजना में भी उपयोग की संभावना

सरकार की Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत लगभग 10.5 करोड़ गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। यदि इस योजना के तहत LPG में DME का मिश्रण किया जाता है तो इसके लिए लगभग 1,300 टन प्रतिदिन DME उत्पादन क्षमता की आवश्यकता होगी।

रसोई के अलावा कई उपयोग

DME का उपयोग सिर्फ खाना पकाने तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल

  • ऑटोमोबाइल ईंधन के रूप में
  • एयरोसोल उत्पादों में प्रोपेलेंट के तौर पर
  • ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले CFCs के विकल्प के रूप में
  • तथा रसायन उद्योग में विभिन्न रसायनों के उत्पादन में

भी किया जा सकता है।

कैसे काम करती है तकनीक

CSIR-NCL के वैज्ञानिकों ने मेथेनॉल को डाइमेथाइल ईथर में बदलने की तकनीक विकसित की है। इस शोध टीम का नेतृत्व Thirumalaiswamy Raja ने किया।

इस प्रक्रिया में एक अत्यधिक सक्रिय और किफायती कैटेलिस्ट का उपयोग किया जाता है, जिससे लगभग 10 बार दबाव पर DME तैयार किया जा सकता है। इससे गैस को सीधे LPG सिलेंडरों में भरना संभव हो जाता है और उत्पादन लागत भी कम रहती है।

चूल्हे का विशेष प्रोटोटाइप भी तैयार

वैज्ञानिकों ने एक विशेष पेटेंटेड बर्नर भी विकसित किया है जो

  • 100% LPG
  • 100% DME
  • या दोनों के किसी भी मिश्रण

पर काम कर सकता है। इस बर्नर का परीक्षण LPG Equipment Research Centre, बेंगलुरु में किया जा चुका है।

अगला कदम: औद्योगिक स्तर पर उत्पादन

CSIR-NCL अब 2.5 टन प्रतिदिन क्षमता वाला एक औद्योगिक डेमो प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है। इसे अगले 6 से 9 महीनों में स्थापित करने की योजना है। यदि यह सफल रहा तो आगे 50 से 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाले वाणिज्यिक संयंत्र लगाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DME का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, LPG आयात कम होगा और देश का ऊर्जा मिश्रण अधिक स्वच्छ बनेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।