ट्रंप ने कॉपर आयात पर 50% टैरिफ की घोषणा की: प्रमुख उद्योगों पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि उनकी सरकार अब कॉपर (तांबे) के आयात पर 50% टैरिफ लगाएगी। यह कदम देश में तांबे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जो कि इलेक्ट्रिक वाहन, पावर ग्रिड, उपभोक्ता..
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि उनकी सरकार अब कॉपर (तांबे) के आयात पर 50% टैरिफ लगाएगी। यह कदम देश में तांबे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जो कि इलेक्ट्रिक वाहन, पावर ग्रिड, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों सहित कई उद्योगों के लिए जरूरी धातु है।
ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में कहा, "आज हम कॉपर पर काम कर रहे हैं," और टैरिफ दर की पुष्टि की, हालांकि इसे लागू करने की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
यह नया शुल्क ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनकी आक्रामक व्यापार नीतियों की कड़ी में नया कदम है। इससे पहले वह स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर भी भारी टैरिफ लगा चुके हैं।
कॉपर की कीमतों में उछाल
ट्रंप के इस ऐलान के बाद कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिका के सबसे सक्रिय कॉमेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में 10% से अधिक की बढ़ोतरी हुई और यह $5.8955 प्रति पाउंड पर पहुंच गया।
वहीं अमेरिका की प्रमुख तांबा उत्पादक कंपनी Freeport-McMoRan के शेयरों में 5% की तेजी आई, क्योंकि घरेलू खनिकों को इस टैरिफ से लाभ होने की संभावना जताई जा रही है।
क्यों लगाया गया टैरिफ?
अमेरिका अपनी लगभग 50% कॉपर आपूर्ति आयात के ज़रिए पूरा करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा चिली से आता है।
फरवरी में अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 232 के तहत कॉपर आयात की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू की थी। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने मंगलवार को कहा कि यह जांच पूरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा, "मकसद है कि कॉपर को देश में वापस लाया जाए, देश में इसका उत्पादन बढ़ाया जाए।"
उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम स्टील और एल्युमिनियम पर पहले से लगे टैरिफ के अनुरूप है।
आगे और टैरिफ संभव
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह और भी कठोर टैरिफ लगा सकते हैं — जैसे कि दवाओं के आयात पर 200% तक का शुल्क। हालांकि, कंपनियों को उत्पादन अमेरिका में लाने के लिए 18 महीने तक की मोहलत मिल सकती है।
प्रमुख उद्योगों पर प्रभाव:
1. इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
कॉपर बैटरियों, मोटरों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अनिवार्य है। इससे ईवी की लागत बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी या इसकी स्वीकार्यता धीमी हो सकती है।
2. निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र
बिजली ग्रिड और रिहायशी निर्माण कार्यों में कॉपर वायरिंग और ट्यूबिंग का व्यापक इस्तेमाल होता है। इसके महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ेगी।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता सामान
लैपटॉप, स्मार्टफोन, होम अप्लायंसेज़ आदि में कॉपर की बड़ी मात्रा लगती है। कंपनियां अगर टैरिफ का बोझ उपभोक्ताओं पर डालती हैं तो इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
4. रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र
सैन्य उपकरणों में वायरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए भारी मात्रा में कॉपर की जरूरत होती है। इससे रक्षा बजट पर दबाव पड़ सकता है और सैन्य उपकरणों की खरीद में देरी संभव है।
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