आरएसएस एक विशाल वट वृक्ष, इसने मुझ सहित लाखों लोगों को देश के लिए जीने की प्रेरणा दी: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना "वट वृक्ष" से करते हुए उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि आरएसएस भारत की महान परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान कर रहा है।
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना "वट वृक्ष" से करते हुए उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि आरएसएस भारत की महान परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान कर रहा है। मोदी ने यह भी कहा कि इस संगठन ने "लाखों लोगों की तरह मुझे भी देश के लिए जीने की प्रेरणा दी।"
प्रधानमंत्री 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जो 71 वर्षों के अंतराल के बाद दिल्ली में आयोजित किया गया। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार ने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया है।
आरएसएस से मिला मराठी संस्कृति से जुड़ने का सौभाग्य
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार के साथ मंच साझा करते हुए मोदी ने कहा कि "आरएसएस के कारण ही मुझे मराठी संस्कृति और भाषा से जुड़ने का सौभाग्य मिला।"
उन्होंने महाराष्ट्र की ऐतिहासिक हस्तियों का जिक्र करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज, अहिल्याबाई होल्कर और डॉ. बी. आर. अंबेडकर के योगदान को याद किया। मोदी ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का भी परोक्ष रूप से उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, "यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हो चुके हैं, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती मनाई जा रही है और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के प्रयासों से बना संविधान अपने 75वें वर्ष में है। हमें इस बात का भी गर्व है कि महाराष्ट्र की भूमि पर एक महान मराठीभाषी व्यक्ति ने 100 वर्ष पहले आरएसएस की नींव रखी थी। आज यह एक विशाल वट वृक्ष की तरह अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है।"
"पिछले 100 वर्षों से यह संगठन वेदों से लेकर विवेकानंद तक की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए एक पवित्र सांस्कृतिक अनुष्ठान कर रहा है। लाखों लोगों की तरह मुझे भी आरएसएस से प्रेरणा मिली है कि मैं अपने देश के लिए जीऊं। संघ के कारण ही मुझे मराठी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।"
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलना एक ऐतिहासिक क्षण
मोदी ने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने को एक महान उपलब्धि बताते हुए कहा, "करोड़ों लोग इसका इंतजार कर रहे थे। मैं इसे अपने जीवन की एक बड़ी उपलब्धि मानता हूं।"
"भाषाओं में कोई वैर नहीं होता, वे एक-दूसरे को समृद्ध करती हैं"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया उर्दू भाषा पर दिए बयान के संदर्भ में मोदी ने भाषाओं के बीच सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "भाषाओं में कभी कोई आपसी बैर नहीं रहा। भाषाओं ने हमेशा एक-दूसरे को अपनाया है और एक-दूसरे को समृद्ध किया है।"
राजनीति और साहित्य के संबंध पर बोले शरद पवार
सम्मेलन के स्वागत समिति के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी को इस कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए धन्यवाद दिया। महाराष्ट्र के कुछ नेताओं द्वारा इस साहित्यिक आयोजन के राजनीतिकरण का आरोप लगाए जाने के बीच पवार ने कहा, "राजनीति और साहित्य के बीच आपसी प्रवाह होता है और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।"
मराठी भाषा को बढ़ावा देने में शिवाजी महाराज की भूमिका
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को मराठी भाषा के संरक्षण और विस्तार का अग्रदूत बताते हुए कहा, "जब आक्रमणकारियों ने हमारी भाषा को दूषित करने की कोशिश की, तब शिवाजी महाराज ने आदेश दिया कि प्रशासनिक कार्यों में केवल मराठी भाषा का ही उपयोग किया जाएगा। उन्होंने फारसी और अरबी शब्दों को हटाने के निर्देश दिए। इसी से हमने अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और गर्व करना सीखा।"
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