राहुल गांधी ने संसद में उठाया सवाल: “जब ट्रंप पाकिस्तानी सेना प्रमुख के साथ लंच कर रहे थे, तब सरकार चुप क्यों थी?”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दुनिया भर के नेताओं से भारत की बातचीत और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भेजे गए संदेशों के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को लंच पर आमंत्रित ..
नयी दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दुनिया भर के नेताओं से भारत की बातचीत और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भेजे गए संदेशों के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को लंच पर आमंत्रित किया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार ने इस पर ट्रंप से कोई जवाब-तलब तक नहीं किया।
लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने कहा, “जब हमारी टीम दुनिया भर में घूमकर बता रही थी कि पाकिस्तान आतंकवाद फैला रहा है, उसी समय अमेरिका के राष्ट्रपति असीम मुनीर के साथ लंच कर रहे थे। हमारे विदेश मंत्री किस ग्रह से हैं?”
उन्होंने आगे कहा, “पहलगाम हमले के पीछे जो दिमाग था, असीम मुनीर.. वही ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में बैठा था। ट्रंप ने सारे प्रोटोकॉल तोड़कर उस व्यक्ति को बुलाया जिसने भारत में आतंकवाद फैलाया। और, ट्रंप ने कहा कि उसने असीम मुनीर को इसलिए बुलाया क्योंकि उसने युद्ध को बढ़ाने से रोका।”
राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इस मुलाकात को लेकर ट्रंप से कोई आपत्ति तक नहीं जताई।
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया के किसी भी देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की, बल्कि केवल आतंकवाद की निंदा की।
इससे साफ है कि इन देशों की सोच क्या है। और यह भी साफ हो गया कि हमारी सरकार दुनिया को यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि आतंकवाद का स्रोत कौन है।”
राहुल ने कहा कि यह वही मानसिकता है जिसकी वजह से रक्षा मंत्री ने चीन का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने कहा, “आपने पूरे भाषण में एक बार भी ‘चीन’ शब्द नहीं लिया। क्यों? क्योंकि आप डरे हुए हैं। आज हम चीन और पाकिस्तान के गठबंधन का सामना कर रहे हैं। यह एक खतरनाक समय है।”
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने कहा था, "आतंकवाद का हर कृत्य, युद्ध का कृत्य माना जाएगा" और इस बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इसका मतलब क्या हुआ? अब अगर कोई आतंकवादी चाहता है कि भारत युद्ध करे, तो वह एक हमला करेगा और भारत को युद्ध के लिए मजबूर कर देगा।
आपने उन्हें वह ताकत दे दी है। अब वे जब चाहें भारत को युद्ध में खींच सकते हैं।” राहुल गांधी ने कहा कि इससे यह साफ होता है कि सरकार में पाकिस्तान के खिलाफ कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति (Political Will) नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरकार ने सेना को भेजा तो जरूर, लेकिन उसे कार्रवाई की पूरी आज़ादी नहीं दी।
उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का हवाला देते हुए कहा, “राजनाथ जी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर 1:05 बजे शुरू हुआ और 1:35 पर हमने पाकिस्तान को कॉल कर बताया कि हमने नॉन-मिलिट्री टारगेट्स पर हमला किया है’। सरकार को थलसेना, वायुसेना और नौसेना की समझ ही नहीं है।”
अंत में राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बांग्लादेश युद्ध के दौरान की “निर्णायक कार्रवाई” का उदाहरण देते हुए कहा कि आज की सरकार उस स्तर की स्पष्टता और निर्णायकता नहीं दिखा पा रही है।
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