"अर्थव्यवस्था को तो बंद नहीं कर सकते": रूस से तेल आयात को लेकर पश्चिमी दबाव पर भारत के उच्चायुक्त का पलटवार
ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने रूस से तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों के दबाव का करारा जवाब देते हुए कहा कि "भारत केवल भू-राजनीतिक तनावों की वजह से अपनी अर्थव्यवस्था को तो बंद नहीं..
लंदन। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने रूस से तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों के दबाव का करारा जवाब देते हुए कहा कि "भारत केवल भू-राजनीतिक तनावों की वजह से अपनी अर्थव्यवस्था को तो बंद नहीं कर सकता।"
हाल ही में टाइम्स रेडियो को दिए एक साक्षात्कार में दोराईस्वामी ने पश्चिमी देशों के रुख की दोहरी नीति को उजागर करते हुए कहा कि "जब कई यूरोपीय देश उन्हीं देशों से दुर्लभ खनिज और ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं जिनसे भारत को खरीदने से रोका जाता है, तो यह कुछ अजीब नहीं लगता?"
"ऊर्जा संबंध है रूस से"
जब उनसे भारत और रूस के बीच निकट संबंधों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि भारत का रूस के साथ संबंध कई आधारों पर टिका हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज भारत और रूस के बीच का संबंध मुख्य रूप से "ऊर्जा आधारित" है, जो इस वजह से बना क्योंकि "जिन स्रोतों से हम पहले ऊर्जा खरीदते थे, वहां से अब बाकी सभी देश खरीद रहे हैं और हमें बाहर कर दिया गया है।" उन्होंने कहा,
"कृपया वफादारी की परीक्षा न लें"
दोराईस्वामी ने यह भी कहा कि दुनिया भर के देशों के ऐसे कई रिश्ते हैं जो भारत के लिए चुनौतियों का स्रोत हैं, लेकिन फिर भी भारत उन पर सवाल नहीं उठाता। "क्या हम आपसे वफादारी की परीक्षा लेने को कहते हैं?"
"भारत युद्ध का समर्थक नहीं"
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार यह दोहराया है कि "यह युद्ध का युग नहीं है" और भारत चाहता है कि यह संघर्ष समाप्त हो।
दोराईस्वामी ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात न केवल रूसी राष्ट्रपति से बल्कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी स्पष्ट रूप से कही है," उन्होंने कहा, "हम इस भयावह युद्ध को समाप्त होते देखना चाहते हैं, जैसे हम दुनिया भर के संघर्षों को खत्म होते देखना चाहते हैं।"
पृष्ठभूमि
भारत पारंपरिक रूप से मध्य पूर्व से तेल आयात करता रहा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने नए खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कच्चे तेल पर छूट देना शुरू कर दिया, जिससे भारत को नया विकल्प मिला।
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