129 करोड़ रुपए की वसूली, 9 FIR, 19 गिरफ्तारियां: PM मोदी के निर्देश के बाद जल जीवन मिशन में गड़बड़ियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) में हुई गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देने के बाद कम से कम सात राज्यों ने दोषी ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगाया है और वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अब तक कुल 129 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की पहचान की जा चुकी..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) में हुई गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देने के बाद कम से कम सात राज्यों ने दोषी ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगाया है और वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अब तक कुल 129 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की पहचान की जा चुकी है।
जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के मिशन के उद्देश्य को कमजोर करने वाली किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा है, “हमने यह योजना हर घर तक पानी पहुँचाने के मकसद से शुरू की थी। किसी ने भी कोई गड़बड़ी की है, उसे अब नहीं छोड़ा जाएगा। आपको सख्त कार्रवाई करनी ही होगी।”
DDWS के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने और राज्यों के साथ निरंतर समन्वय बनाकर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जल जीवन मिशन: 2019 में शुरुआत, अब 2028 तक बढ़ा लक्ष्य
जल जीवन मिशन 2019 में शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण घर को नल से जल उपलब्ध कराना था। मूल समय सीमा 2024 तय की गई थी लेकिन अभी कई क्षेत्रों में कार्य अधूरा है। 1 फरवरी के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि योजना को 2028 तक बढ़ाकर अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।
गुजरात और राजस्थान में सबसे ज्यादा वसूली
केंद्र के निर्देशों के बाद तमिलनाडु, त्रिपुरा, गुजरात, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान ने जुर्माना लगाने और वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है।
- कुल वसूली की पहचान: ₹129 करोड़ से अधिक
- वास्तविक वसूली: ₹12.95 करोड़
- गुजरात: ₹120.65 करोड़ (सबसे अधिक)
- राजस्थान: ₹5.34 करोड़
राज्यों ने यह कार्रवाई केंद्रीय नोडल अधिकारियों (CNO) की रिपोर्ट के आधार पर की है, जिनमें जमीनी स्तर पर मिली खामियों और गंभीर अनियमितताओं का ज़िक्र था।
उत्तर प्रदेश, जहाँ से भारी संख्या में शिकायतें आईं, ने 119 में से 113 मामलों में दोषी ठेकेदारों पर 0.1% से 10% तक की “लिक्विडेटेड डैमेज” पेनल्टी लगाई है। छह मामलों में ठेकेदारों के कार्यक्षेत्र में बड़ी कटौती की गई, जिससे 43 से 212 गाँव प्रभावित हुए।
62 सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई, 9 FIR, 19 गिरफ्तारियां
अधिकारी के अनुसार 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 32 ने अपने स्टेटस रिपोर्ट भेज दी है। इनमें से 20 राज्यों जैसे असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, केरल, लद्दाख, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने 607 मामलों में अनियमितताएँ रिपोर्ट की हैं।
अब तक की कार्रवाई
- 62 सरकारी अधिकारी,
- 969 ठेकेदार,
- 153 थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसियाँ (TPIA)
पर कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा, 20 अधिकारियों, 10 ठेकेदारों और 1 TPIA के खिलाफ 9 FIR दर्ज की गई हैं। कार्रवाई में अब तक एक पूर्व मंत्री, 10 अधिकारी और 8 ठेकेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
12 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों ने ‘Nil’ रिपोर्ट दी
दूसरी ओर, बिहार, आंध्र प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना सहित कई पूर्वोत्तर और द्वीपीय केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक किसी भी मामले की जानकारी नहीं दी है और ‘Nil’ स्टेटस रिपोर्ट जमा की है।
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