फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) सांसद अवधेश प्रसाद का आरोप:‘ध्वजारोहण’ में नहीं बुलाया गया क्योंकि मैं दलित हूं
समाजवादी पार्टी के फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) से सांसद अवधेश प्रसाद ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराने (‘ध्वज आरोहण’) के कार्यक्रम में इसलिए आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं..
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) से सांसद अवधेश प्रसाद ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराने (‘ध्वज आरोहण’) के कार्यक्रम में इसलिए आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं।
अवधेश प्रसाद ने X (ट्विटर) पर हिंदी में पोस्ट किया, ‘धर्म ध्वज’ समारोह में मुझे इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि मैं दलित समुदाय से हूं। यह राम के आदर्शों के अनुरूप नहीं है, बल्कि किसी की संकीर्ण सोच है। राम सबके हैं। मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण के लिए नहीं, बल्कि सम्मान, समानता और संविधान की गरिमा के लिए है।’
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराने के साथ संपन्न हुआ, जो मंदिर निर्माण की औपचारिक पूर्णता का प्रतीक माना गया—एक ऐसा चुनावी वादा जिसे भाजपा दशकों से दोहराती रही है।
पीएम मोदी ने इसे “भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण” का क्षण बताया।
फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) सीट की अहमियत
फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से एक है, जिसमें अयोध्या और फ़ैज़ाबाद शहर दोनों शामिल हैं। नवंबर 2018 में ज़िले का नाम बदला गया था लेकिन लोकसभा सीट का नाम अब भी फ़ैज़ाबाद ही है।
2024 के लोकसभा चुनावों में अवधेश प्रसाद ने भाजपा के मौजूदा सांसद लल्लू सिंह को 50,000 से अधिक वोटों से हराया था। यह भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनावी हारों में से एक मानी गई।
विजय के बाद उन्होंने पोस्ट किया था:“अयोध्या किसी की पुश्तैनी जागीर नहीं, यह भगवान श्री राम की भूमि है। हम सच्चे रामभक्त हैं, हमसे बड़ा रामभक्त कोई नहीं हो सकता। अयोध्या के देवतुल्य लोगों ने अहंकारियों को पराजित किया।”
राम मंदिर और चुनावी परिदृश्य
राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी और कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ था। इसके कुछ महीनों बाद हुए चुनाव में भाजपा यह सीट जीतने में विफल रही।
विश्लेषकों ने भाजपा की हार के कारण बताए..
- भाजपा के ‘अगली बार 400 पार’ नारे का प्रभाव कम पड़ना
- समाजवादी पार्टी की सामाजिक समीकरण वाली रणनीति—OBC, दलित और मुस्लिम समुदायों को साथ लाना
- अयोध्या में विकास के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले मुआवजा न मिलने पर स्थानीय नाराज़गी
- दिल्ली और लखनऊ नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी
इन सभी कारकों ने मिलकर अयोध्या जैसे भाजपा के प्रतिष्ठित क्षेत्र में अप्रत्याशित चुनावी नतीजा पैदा किया।
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