वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, सुप्रीम कोर्ट ने पैनल से वकीलों को बाहर रखने का फैसला किया

सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं (Senior Advocates) के नामांकन की प्रक्रिया से वकीलों को बाहर रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला 2017 से चली आ रही व्यवस्था से एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। यह निर्णय मंगलवार को मंजूर की गई नयी गाइडलाइंस में शामिल किया..

वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, सुप्रीम कोर्ट ने पैनल से वकीलों को बाहर रखने का फैसला किया
12-02-2026 - 10:48 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं (Senior Advocates) के नामांकन की प्रक्रिया से वकीलों को बाहर रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला 2017 से चली आ रही व्यवस्था से एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। यह निर्णय मंगलवार को मंजूर की गई नई गाइडलाइंस में शामिल किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को जारी नई नियमावली का शीर्षक है..
“Guidelines for Designation of Senior Advocates by the Supreme Court of India, 2026”

इन दिशानिर्देशों में 13 मई 2025 को तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के अनुरूप वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं। उस फैसले में 2023 की गाइडलाइंस में बड़े बदलाव सुझाए गए थे, जिनमें अंकों (प्वाइंट्स) के आधार पर मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त करना भी शामिल था।

पहले क्या व्यवस्था थी?

पहले के दिशानिर्देशों के तहत, वरिष्ठ अधिवक्ता के नामांकन की सिफारिश के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक स्थायी समिति (Permanent Committee) गठित की जाती थी, जिसमें शामिल थे—

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
  • सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश
  • दो वकील प्रतिनिधि:
    • अटॉर्नी जनरल
    • बार से एक प्रतिष्ठित वरिष्ठ वकील (जिसे बाकी चार सदस्य मिलकर चुनते थे)

अब क्या बदला?

हालांकि मई 2025 के फैसले में समिति की संरचना बदलने का सीधा निर्देश नहीं दिया गया था, लेकिन उसमें वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन प्रक्रिया में वकीलों की भूमिका पर गंभीर पुनर्विचार की जरूरत बताई गई थी।

इसके बाद मंगलवार को हुई बैठक में CJI और सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की फुल कोर्ट ने यह तय किया कि अब यह समिति केवल—

  • मुख्य न्यायाधीश (CJI)
  • सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश तक ही सीमित रहेगी।
    यही समिति इस प्रक्रिया में सहायता के लिए गठित की जाने वाली स्थायी सचिवालय (Permanent Secretariat) की संरचना भी तय करेगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा क्या है?

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के तहत दिया जाता है। यह सम्मान सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट द्वारा उन वकीलों को प्रदान किया जाता है, जिनकी—

  • बार में प्रतिष्ठित पहचान
  • असाधारण क्षमता
  • विधि का विशेष ज्ञान या अनुभव होता है।

2017 से अब तक का सफर

  • 2017 (इंदिरा जयसिंह केस):
    फुल कोर्ट के बजाय एक समिति को वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन का अधिकार दिया गया। इसमें अंकों के आधार पर वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई, जिसमें अनुभव, फैसलों में योगदान, प्रकाशन और विशेषज्ञता जैसे मापदंड शामिल थे।
  • 2023:
    इंदिरा जयसिंह केस के फैसले में संशोधन किया गया और नई गाइडलाइंस लागू रहीं।
  • फरवरी 2025 (जितेंद्र @ कल्ला बनाम राज्य):
    दो-न्यायाधीशों की पीठ ने 2023 की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। मामला CJI को भेजा गया।
  • मई 2025:
    CJI
    द्वारा गठित तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने अंतिम फैसला सुनाया और अंकों की प्रणाली तथा इंटरव्यू प्रक्रिया को समाप्त कर दिया।

मई 2025 के फैसले के मुख्य बिंदु

  • वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की फुल कोर्ट का होगा।
  • कम से कम 10 वर्ष की वकालत का अनुभव रखने वाले वकील आवेदन के पात्र होंगे।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता नामांकन की प्रक्रिया साल में कम से कम एक बार आयोजित की जाएगी।
  • फैसले में कहा गया था, इंदिरा जयसिंह-1 (2017) के बाद पिछले साढ़े सात वर्षों के अनुभव को देखते हुए,

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।