बंगाल में एसआईआर विवाद: ‘अवैध रूप से मतदाता जोड़ने’ के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी
चुनाव आयोग (ईसी) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से 72 घंटे के भीतर यह रिपोर्ट मांगी है कि दो जिलों में मतदाता सूची में कथित तौर पर अवैध रूप से नाम जोड़ने के आरोपी चार राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की..
कोलकाता। चुनाव आयोग (ईसी) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से 72 घंटे के भीतर यह रिपोर्ट मांगी है कि दो जिलों में मतदाता सूची में कथित तौर पर अवैध रूप से नाम जोड़ने के आरोपी चार राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
इससे पहले चुनाव आयोग ने कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) देबोत्तम दत्त चौधरी और बिप्लब सरकार तथा सहायक ईआरओ (एईआरओ) तथागत मंडल और सुदीप्तो दास को निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की थी।
आरोप है कि इन चारों अधिकारियों ने पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों में मतदाता सूचियों में अवैध रूप से मतदाताओं के नाम शामिल किए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा, “आपसे अनुरोध है कि आयोग के 05.08.2025 के पत्र का संदर्भ लें, जिसमें संबंधित ईआरओ/एईआरओ को निलंबित करने, उनके खिलाफ उपयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।”
आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि 24 जनवरी को शाम 5 बजे तक इन निर्देशों को लागू क्यों नहीं किया गया। चुनाव आयोग ने शुरुआत में ही अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज पंत ने कथित तौर पर इन आदेशों पर अमल नहीं किया।
चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा, “हमारे बार-बार आदेश देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अब हमने संबंधित जिलाधिकारियों से कार्रवाई करने को कहा है।”
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
यह मामला उस समय और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने झाड़ग्राम में एक सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है।
राज्य के गृह विभाग के विशेष आयुक्त ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश को वापस लेने की मांग की थी। पत्र में कहा गया था कि यह “छोटी गलतियों के लिए बड़ी सजा” होगी।
बताया गया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह पत्र दिल्ली भेजा, लेकिन चुनाव आयोग अपने रुख पर अड़ा रहा और स्पष्ट शब्दों में कहा, “चुनावी कानून के क्रियान्वयन में किसी भी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”
विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) से पहले चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि कथित तौर पर “घोस्ट वोटर्स” जोड़ने के मामले में संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए, विभागीय जांच कराई जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
उस समय आयोग ने कहा था, “मतदाता सूचियों की शुचिता बनाए रखने के लिए कार्रवाई अनिवार्य है।”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला
सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान कानून-व्यवस्था की सख्त निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
चुनाव आयोग ने आगे डीजीपी, कोलकाता पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि एसआईआर स्थलों पर किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या न उत्पन्न हो। आयोग ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की अवहेलना या बाधा उत्पन्न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
What's Your Reaction?