‘बेबुनियाद आरोप क्यों?’: राहुल गांधी के कर्नाटक ‘धांधली’ दावे पर चुनाव आयोग का पलटवार
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान कथित धांधली के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने गुरुवार को सख्त प्रतिक्रिया दी। आयोग ने कहा कि यदि इस संबंध में याचिका पहले ही अदालत में दायर की जा चुकी है, तो फैसला आने तक इंतजार..
नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान कथित धांधली के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने गुरुवार को सख्त प्रतिक्रिया दी। आयोग ने कहा कि यदि इस संबंध में याचिका पहले ही अदालत में दायर की जा चुकी है, तो फैसला आने तक इंतजार किया जाना चाहिए — ऐसे में "बेबुनियाद आरोप लगाने का क्या औचित्य है?"
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमारे पास सौ फीसदी पक्के सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर धांधली की इजाजत दी।"
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि "चुनाव आयोग को अगर लगता है कि वह इससे बच निकलेगा, तो वह गलतफहमी में है, हम इसे नहीं छोड़ेंगे।"
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग अब "भारत का चुनाव आयोग नहीं रहा, यह अपना काम नहीं कर रहा है।" राहुल गांधी ने बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी चुनाव आयोग की सफाई को “बकवास” बताया और उस पर संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया।
उन्होंने आगे कहा, "हमने सिर्फ एक ही विधानसभा सीट को देखा और उसमें हजारों नए मतदाता पाए, जिनकी उम्र 45, 50, 60 साल तक थी। मतदाता हटाए जा रहे हैं, नए जोड़े जा रहे हैं। और ये सब एक पैटर्न के तहत हो रहा है।”
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने कहा, “अगर चुनाव याचिका दायर की गई है, तो माननीय हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करें। अगर नहीं की गई, तो अब बेबुनियाद आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं?”
आयोग ने बताया कि..
- चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर कोई भी असंतुष्ट व्यक्ति राज्य की संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है।
- आयोग के अनुसार, ऐसी याचिकाएं ही सही मंच होती हैं, ना कि सार्वजनिक बयानबाजी।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सफाई
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने बयान जारी कर कहा, “2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जब स्पेशल समरी रिवीजन हुआ, उस दौरान सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची की प्रतियां सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दी गईं, इसमें कांग्रेस भी शामिल थी।”
Electoral rolls are prepared transparently; copies were shared with recognised political parties pic.twitter.com/XIoVx2qEru — Chief Electoral Officer, Karnataka (@ceo_karnataka) July 24, 2025
बिहार SIR विवाद
बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि यह वंचित वर्गों और विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास है।
कांग्रेस का आरोप है कि..
“बीजेपी इस प्रक्रिया का उपयोग राज्य विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए कर रही है।” जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह “पारदर्शी प्रक्रिया” है और यह “स्वस्थ लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नींव” है।
चुनाव आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दें।
What's Your Reaction?