I-PAC को 2021 में रोहतक की एक ‘गैर-मौजूद’ कंपनी से मिला 13.5 करोड़ रुपये का कर्ज: रिपोर्ट
राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, I-PAC को 2021 में रोहतक स्थित एक ऐसी कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का “अनसिक्योर्ड लोन” मिला था, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही..
नयी दिल्ली। राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, I-PAC को 2021 में रोहतक स्थित एक ऐसी कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का “अनसिक्योर्ड लोन” मिला था, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं है।
I-PAC हाल के दिनों में राजनीतिक विवादों के केंद्र में है, खासकर तब से जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम द्वारा I-PAC के निदेशक के आवास पर की जा रही तलाशी को बीच में रोकने की कोशिश की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस नाम की कंपनी से कर्ज मिलने का दावा किया गया है, उसी पते पर इसी तरह के नाम वाली एक अन्य कंपनी पहले मौजूद थी लेकिन उसे अगस्त 2018 में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। यह कथित कर्ज दिए जाने की तारीख से लगभग तीन साल पहले की बात है।
उस कंपनी के तहत दर्ज छह शेयरधारकों ने कहा कि उन्हें I-PAC के साथ किसी भी तरह के लेन-देन की जानकारी नहीं है और उन्होंने किसी भी प्रकार का कर्ज देने से इनकार किया है।
दिए गए पते पर कोई कंपनी मौजूद नहीं
ROC में दाखिल दस्तावेजों की जांच के दौरान रिपोर्ट में पाया कि I-PAC ने 17 दिसंबर 2021 के एक दस्तावेज में “लेनदारों की सूची” संलग्न की थी, जिसमें यह घोषित किया गया था कि उसे ‘रामासेतु इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडिया (प्रा.) लिमिटेड’ नाम की कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन मिला है।
I-PAC द्वारा दिए गए दस्तावेज में लेंडर का पता बताया गया था, तीसरी मंजिल, अशोका प्लाजा, दिल्ली रोड, रोहतक, हरियाणा।
हालांकि, रिपोर्ट में सामने आया कि इस पते पर ऐसी कोई कंपनी संचालित नहीं हो रही है। ROC रिकॉर्ड की जांच में यह भी पाया गया कि ‘Ramasetu Infrastructure India (P) Limited’ नाम की कोई कंपनी कभी पंजीकृत ही नहीं हुई।
ROC रिकॉर्ड में केवल ‘Ramsetu Infrastructure India Private Limited’ नाम की एक कंपनी का उल्लेख मिलता है, जिसे अक्टूबर 2013 में इसी रोहतक पते पर पंजीकृत किया गया था। लेकिन, इस कंपनी को 8 अगस्त 2018 को ROC ने अपने रिकॉर्ड से हटा दिया था यानी I-PAC द्वारा कर्ज प्राप्त करने के दावे से करीब तीन साल पहले।
ROC दस्तावेजों के अनुसार, इस कंपनी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 248(1) के तहत भंग किया गया था। यह धारा उन कंपनियों को हटाने की अनुमति देती है जिन्होंने कारोबार शुरू नहीं किया, लगातार दो वर्षों तक संचालन बंद रखा या वैधानिक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया।
हैरानी की बात यह है कि I-PAC ने 27 जून 2025 के एक अन्य घोषणा-पत्र में कहा कि उसने 2024-25 के दौरान इस 13.50 करोड़ रुपये के कर्ज में से 1 करोड़ रुपये “चुका दिए” हैं और अब भी 12.50 करोड़ रुपये बकाया हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि इसी तरह के नाम वाली आठ अन्य कंपनियों के ROC दस्तावेजों की भी जांच की। 2021 और उसके बाद दाखिल किए गए किसी भी दस्तावेज में 13.50 करोड़ रुपये के इस कथित कर्ज से जुड़ा कोई लेन-देन दर्ज नहीं पाया गया।
2022 में I-PAC का कार्यालय कोलकाता शिफ्ट
ROC दस्तावेजों के मुताबिक, I-PAC को 13 अप्रैल 2015 को पटना में पंजीकृत किया गया था और फरवरी 2022 में इसका रजिस्टर्ड ऑफिस कोलकाता स्थानांतरित किया गया। कंपनी की स्थापना से लेकर अब तक इसके निदेशक और शेयरधारक प्रतीक जैन, रिशिराज सिंह और विनेश चंदेल एक जैसे बने हुए हैं।
I-PAC निदेशक के आवास पर ईडी की छापेमारी
कुछ सप्ताह पहले, प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल में छह स्थानों पर छापेमारी की थी। इनमें I-PAC प्रमुख और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आईटी सेल प्रमुख प्रतीक जैन का लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और सेक्टर-V, कोलकाता में स्थित कंपनी का कार्यालय (गोडरेज वाटरसाइड बिल्डिंग) शामिल था। इसके अलावा, दिल्ली में भी I-PAC से जुड़े चार स्थानों पर छापे मारे गए थे।
छापेमारी के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं। ममता ने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारी टीएमसी से जुड़े संवेदनशील संगठनात्मक डेटा वाले हार्ड डिस्क और आंतरिक दस्तावेज जब्त करने की कोशिश कर रहे थे।
इसके बाद मुख्यमंत्री सेक्टर-V स्थित I-PAC कार्यालय पहुंचीं, जहां वह करीब एक घंटे तक रहीं और फिर मीडिया से बातचीत की।
ममता बनर्जी अपने साथ एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज दोनों स्थानों से ले गईं। उन्होंने छापेमारी को “राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक” करार दिया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “उन्होंने हमारे आईटी प्रमुख के घर पर छापा मारा। वे मेरी पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त कर रहे थे, जिनमें विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का विवरण था। मैं वे सब वापस ले आई हूं।”
इस कार्रवाई को डराने-धमकाने की कोशिश बताते हुए ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को “सबसे घटिया गृह मंत्री” कहा।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन 22 जनवरी 2026 से से तीन दिन के लिए कोलकाता पहुंचे है। रिपोर्ट के अनुसार, साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स के ईडी सूत्रों ने बताया कि राहुल नवीन पूर्वी क्षेत्र में चल रहे विभिन्न मामलों—जिसमें I-PAC मामला भी शामिल है, की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई चरणों में बैठक करेंगे।
What's Your Reaction?