सावरकर के पोते ने मानहानि मामले में राहुल गांधी की याचिका का किया विरोध: देरी करने की चाल

मुंबई। हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर के पोते ने पुणे की एक अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जताई है। यह याचिका सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सटीक ऐतिहासिक विवरण और ऐतिहासिक दस्तावेजों के विश्लेषण पर विचार करने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

सावरकर के पोते ने मानहानि मामले में राहुल गांधी की याचिका का किया विरोध: देरी करने की चाल
27-02-2025 - 06:42 PM

मुंबई। हिंदुत्व विचारक वी. डी. सावरकर के पोते ने पुणे की एक अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति जताई है। यह याचिका सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सटीक ऐतिहासिक विवरण और ऐतिहासिक दस्तावेजों के विश्लेषण पर विचार करने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इस याचिका के जरिए मामले को भटकाने और लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधी स्वतंत्रता संग्राम में सावरकर की भूमिका पर अप्रासंगिक तर्क देकर मुकदमे को प्रभावित करना चाहते हैं।

राहुल गांधी, जो लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, देशभर की विभिन्न अदालतों में 18 कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं, जिनमें से 14 मामले मानहानि से जुड़े हैं। इनमें गुजरात के एक मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था और दो साल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी। इसी संदर्भ में सत्यकी सावरकर ने कहा कि गांधी के खिलाफ मानहानि के मामलों में विवादित बयान देने की आदत है।

यह मामला लंदन में अनिवासी भारतीयों के एक समूह को संबोधित करते हुए गांधी द्वारा सावरकर पर की गई विवादास्पद टिप्पणी से जुड़ा है। इन टिप्पणियों के बाद सत्यकी सावरकर ने पुणे की विशेष अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था।

इसके जवाब में राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने अदालत में एक याचिका दायर कर इस मामले को "संक्षिप्त मुकदमे" (Summary Trial) से बदलकर "समन मुकदमे" (Summons Trial) में तब्दील करने की मांग की। गांधी ने अपनी याचिका में कहा कि यह मामला स्वतंत्रता संग्राम के पूर्व-स्वतंत्रता काल के ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़ा है। इसलिए अदालत को सावरकर के योगदान के सटीक ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए और प्रासंगिक ऐतिहासिक दस्तावेजों को सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।

हालांकि, सत्यकी सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर ने इस मांग का कड़ा विरोध किया।

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