'शशि थरूर बीजेपी की स्लीपिंग सेल में जगह तलाश रहे हैं': CPI केरल का कांग्रेस सांसद पर तीखा हमला
केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि थरूर बीजेपी की कांग्रेस के भीतर मौजूद 'स्लीपिंग सेल' में अपनी जगह तलाश रहे हैं..
नयी दिल्ली। केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि थरूर बीजेपी की कांग्रेस के भीतर मौजूद 'स्लीपिंग सेल' में अपनी जगह तलाश रहे हैं।
बिनॉय विश्वम का बयान
बिनॉय विश्वम ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “@RahulGandhi की बीजेपी की कांग्रेस में स्लीपिंग सेल्स को लेकर चिंता इतनी सरल नहीं है। ऐसा लगता है कि @ShashiTharoor उस सेल में अपनी सीट खोज रहे हैं। @BJP4India ऐसे तत्वों का कैसे उपयोग करता है, यह वह अच्छी तरह जानते हैं। उनके लिए तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी सिर्फ पार्टी लाभ का ज़रिया है!”
विवाद की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणी तब सामने आई जब शशि थरूर ने सरकार द्वारा आमंत्रण स्वीकार करते हुए भारत की आतंकवाद विरोधी स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने के लिए एक बहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि कांग्रेस पार्टी की ओर से उनके नाम की आधिकारिक अनुशंसा नहीं की गई थी।
थरूर का जवाब
शशि थरूर ने शनिवार को मीडिया से कहा, “मुझे इसमें कोई राजनीति नहीं दिखती। मेरे लिए राजनीति तब मायने रखती है जब देश होता है। हम सभी भारतीय हैं। जब देश संकट में हो और केंद्र सरकार किसी नागरिक से मदद मांगे, तो आप क्या जवाब देंगे?”
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया, यह देखते हुए कि थरूर के पास अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक अनुभव है।
कांग्रेस के आधिकारिक प्रतिनिधि कौन थे?
केंद्र सरकार की ओर से 4 सांसदों की सूची मांगी गई थी। कांग्रेस ने इन चार नामों की सिफारिश की थी:
- आनंद शर्मा (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
- गौरव गोगोई (लोकसभा में उपनेता)
- सैयद नसीर हुसैन (राज्यसभा सांसद)
- राजा बरार (लोकसभा सांसद)
इस सूची में शशि थरूर का नाम शामिल नहीं था, फिर भी उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वीकार किया, जिस पर CPI ने सवाल उठाए।
CPI का आरोप क्या है?
CPI का तर्क है कि शशि थरूर जैसे नेता कांग्रेस के भीतर बैठे उन चेहरों में से हैं, जिन्हें भाजपा अवसर के अनुसार इस्तेमाल करती है, और इस तरह का कदम राष्ट्रीय मुद्दों को पार्टी फायदे के लिए उपयोग करने का संकेत है।
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