IMF ने पाकिस्तान को $7 बिलियन बेलआउट के लिए थोपीं 11 नयी शर्तें, भारत से बढ़ते तनाव को भी बताया बड़ा खतरा
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को दिए जा रहे $7 बिलियन के राहत पैकेज के लिए 11 नयी सख्त शर्तें लगा दी हैं..
नयी दिल्ली। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान को दिए जा रहे $7 बिलियन के राहत पैकेज के लिए 11 नयी सख्त शर्तें लगा दी हैं। साथ ही IMF ने पाकिस्तान और भारत के बीच बढ़ते तनाव को इस आर्थिक कार्यक्रम के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, नई शर्तों में शामिल हैं..
नयी शर्तों का सारांश
- ₹17.6 लाख करोड़ (पाकिस्तानी रुपये) का नया बजट पास कराना।
- बिजली बिलों पर कर्ज सेवा अधिभार (Debt Servicing Surcharge) बढ़ाना।
- 3 साल से पुराने सेकेंड-हैंड कारों के आयात पर लगी रोक हटाना।
- वित्त वर्ष 2026 के बजट को संसद से मंजूरी दिलाना, जो IMF स्टाफ एग्रीमेंट के अनुरूप हो और जून 2025 तक तय लक्ष्यों को पूरा करे।
भारत-पाक तनाव का ज़िक्र
IMF की स्टाफ लेवल रिपोर्ट में कहा गया, “भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव, यदि बने रहते हैं या और बिगड़ते हैं, तो यह पाकिस्तान के राजकोषीय, बाह्य और सुधार लक्ष्यों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।”
हालांकि IMF ने यह भी कहा कि पिछले दो सप्ताह में दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा है, लेकिन स्टॉक मार्केट पर असर मामूली रहा है, और बाजार अब तक अधिकांश लाभ बनाए हुए है।
रक्षा बजट और IMF का आकलन
- IMF के अनुसार, पाकिस्तान का अगले वित्त वर्ष का रक्षा बजट ₹2.414 लाख करोड़ है, जो 12% की वृद्धि है।
- जबकि पाकिस्तान सरकार ने ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक आवंटन की बात कही है – यानी भारत-पाक तनाव के बाद 18% की बढ़ोतरी।
अन्य नयी शर्तें
- प्रांतों पर कृषि आय कर लागू करना
- सभी 4 प्रांतों को नया Agriculture Income Tax कानून लागू करना होगा।
- इसके लिए एक ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म, करदाता पहचान, पंजीकरण, जन-जागरूकता अभियान और अनुपालन योजना बनानी होगी।
- समाप्ति तिथि: जून 2025
- गवर्नेंस एक्शन प्लान प्रकाशित करना
- IMF के Governance Diagnostic Assessment की सिफारिशों के आधार पर एक्शन प्लान सार्वजनिक करना होगा, ताकि प्रमुख गवर्नेंस कमजोरियों को दूर किया जा सके।
- महंगाई के अनुरूप नकद सहायता राशि बढ़ाना
- Unconditional Cash Transfer Programme में लोगों की खरीद क्षमता बनाए रखने के लिए सालाना मुद्रास्फीति समायोजन (inflation adjustment) करना होगा।
- वित्तीय क्षेत्र की दीर्घकालिक रणनीति
- 2027 के बाद के लिए एक वित्तीय क्षेत्र रणनीति रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी, जिसमें 2028 से आगे के लिए संस्थागत और नियामकीय दृष्टिकोण स्पष्ट हो।
ऊर्जा क्षेत्र की 4 नयी शर्तें
- बिजली दरों को लागत वसूली स्तर पर बनाए रखने के लिए:
- 1 जुलाई तक नई वार्षिक बिजली दरें लागू करनी होंगी (Electricity Tariff Rebasing)।
- गैस दरों को भी लागत वसूली स्तर पर रखने के लिए:
- 15 फरवरी 2026 तक अर्धवार्षिक गैस दर समायोजन (Gas Tariff Adjustment) लागू करना होगा।
- Captive Power Levy कानून को स्थायी बनाना:
- इस महीने के अंत तक संसद में कानून पारित कर Captive Power Levy Ordinance को स्थायी बनाना होगा, ताकि उद्योगों को निजी स्रोतों की बजाय राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली लेने के लिए मजबूर किया जा सके।
कुल शर्तों की संख्या अब 50
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, IMF ने अब तक कुल 50 शर्तें लगा दी हैं, जिनमें से ये 11 नई हैं – और ये सब कुछ सिर्फ $7 बिलियन कर्ज के लिए।
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