शेख हसीना को मौत की सज़ा: फ़ैसला, भारत की प्रतिक्रिया और आगे की राह..

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सोमवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान “मानवता के खिलाफ अपराध” करने का दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई। यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जिनके प्रियजनों की कथित पुलिस दमन में मौत हुई थी, वहीं हसीना फिलहाल भारत में निर्वासित जीवन..

शेख हसीना को मौत की सज़ा: फ़ैसला, भारत की प्रतिक्रिया और आगे की राह..
18-11-2025 - 11:38 AM

नयी दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सोमवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान “मानवता के खिलाफ अपराध” करने का दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई। यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जिनके प्रियजनों की कथित पुलिस दमन में मौत हुई थी, वहीं हसीना फिलहाल भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं।
हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री आसादुज़्ज़ामान खान कमाल को भी मौत की सज़ा दी गई है। वहीं पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून को जांच में सहयोग और जुलाई में दोष स्वीकार करने के बाद 5 साल की सज़ा सुनाई गई।

फैसला: हसीना तीन गंभीर आरोपों में दोषी करार

फैसले को पढ़ते हुए जज गोलाम मुर्तज़ा मोज़ुमदर ने बताया कि शेख हसीना को तीन आरोपों—

  1. हिंसा भड़काने,
  2. हत्या का आदेश देने,
  3. अत्याचार रोकने के लिए कोई कदम न उठाने—
    के लिए दोषी पाया गया।

शुरुआत में अदालत ने आजीवन कारावास देने का संकेत दिया था, लेकिन अन्य गंभीर आरोप जोड़ने के बाद ट्रिब्यूनल ने मौत की सज़ा की घोषणा कर दी।

जज मोज़ुमदर ने कहा, हमने केवल एक ही सज़ा देने का निर्णय किया है.. मौत की सज़ा।”

हसीना और उनके दो सहयोगियों पर पाँच बड़े अपराध सिद्ध किए गए—

  • ढाका में प्रदर्शनकारियों के सामूहिक नरसंहार की साज़िश
  • नागरिक भीड़ पर हेलीकॉप्टर और ड्रोन से फायरिंग
  • छात्र नेता अबू सैयद की हत्या
  • शवों को जलाकर सबूत नष्ट करना (आशुलिया)
  • चांखारपुल में प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हत्या

प्रतिक्रियाएँ: हसीना का दावा—“राजनीतिक साज़िश”

शेख हसीना ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए फैसले को फर्जी”, “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “कंगारू कोर्ट का फैसला” बताया।

वहीं नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने फैसले का स्वागत किया। उनके बयान में कहा गया, बांग्लादेश की अदालतों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।”

फैसले के बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत से हसीना और पूर्व गृह मंत्री कमाल को प्रत्यर्पित करने की मांग की। दोनों अगस्त विद्रोह के बाद ढाका छोड़कर चले गए थे और अनुपस्थिति में ही मुकदमे चले। बांग्लादेश ने भारत पर प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए उन्हें वापस भेजने का आग्रह किया।

 भारत की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने फैसले पर ध्यान दिया है। आधिकारिक बयान में कहा गया, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हित—शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता—के प्रति प्रतिबद्ध है।”

 आगे क्या? शेख हसीना की राह अब भारत के फैसले पर निर्भर

अब शेख हसीना का भविष्य इस पर निर्भर करता है कि नई दिल्ली प्रत्यर्पण अनुरोध पर क्या कदम उठाती है। हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग दोहराते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, इन व्यक्तियों को शरण देना न्याय के प्रति अवमानना और एक गंभीर अमित्रतापूर्ण कदम होगा।”

आगे संभावित कदम:

  1. संपत्तियों की जब्ती:
    इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल सबसे पहले हसीना की संपत्तियाँ राज्य के अधिग्रहण में लेगा।
  2. अपील का विकल्प:
    हसीना चाहें तो फैसले के खिलाफ अपील कर सकती हैं, लेकिन केवल तभी—
    • यदि वह गिरफ्तारी देती हैं, या
    • 30 दिनों के भीतर बांग्लादेश लौटती हैं।
  3. अनुपालन न करने की स्थिति:
    यदि हसीना समन को नज़रअंदाज करती हैं, तो—
    • उन्हें फरार अपराधी (फ्यूजिटिव) घोषित किया जा सकता है।
    • उनकी संपत्तियाँ ज़ब्त हो सकती हैं।
    • उनका पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है।
    • बांग्लादेश इंटरपोल रेड नोटिस जारी करा सकता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।