सुप्रीम कोर्ट सोमवार को निशिकांत दुबे की ‘अराजकता’ वाली टिप्पणी पर याचिका पर करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है। यह याचिका दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर दाखिल की गई है..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है। यह याचिका दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर दाखिल की गई है।
हाल ही में दुबे ने विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट देश को अराजकता की ओर ले जा रहा है” और “देश में जो गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन रही है, उसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना जिम्मेदार हैं।”
उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आलोचनाओं की लहर दौड़ गई।
इस घटनाक्रम के बाद 22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक प्रस्ताव पारित करते हुए भाजपा नेता की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की।
SCBA ने अपने बयान में कहा, “यह बयान न केवल मानहानिपूर्ण है बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी है। यह सुप्रीम कोर्ट जैसे संस्थान और भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव खन्ना जैसे व्यक्ति पर सीधा हमला है, जो अस्वीकार्य है और इसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।”
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि “अपने प्रस्ताव में एससीबीए ने भारत के अटॉर्नी जनरल से दुबे के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति देने की अपील की है, ताकि मुख्य न्यायाधीश की गरिमा की रक्षा की जा सके।”
यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने यह भी मांग की है कि गृह मंत्रालय सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को यह निर्देश दे कि राजनीतिक दल और उनके नेता वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर भड़काऊ व नफरत फैलाने वाले बयान न दें।
अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया और बताया कि भाजपा सांसद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को पत्र दिए गए थे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अपने पत्र याचिका में उन्होंने कहा है, “ये बयान झूठे, गैरजिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण हैं तथा आपराधिक अवमानना के अंतर्गत आते हैं।” साथ ही उन्होंने कोर्ट से यह भी अपील की है कि न्यायपालिका के खिलाफ किए गए अपमानजनक व अवमाननापूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को हटाने का निर्देश दिया जाए।
यह मामला सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
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