मोदी-ट्रंप की दोस्ती अब अतीत की बात: जॉन बोल्टन का बड़ा दावा, बोले- “निजी रिश्ते ट्रंप की नीतियों से किसी को नहीं बचा सकते”
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कभी बेहद नजदीकी माने जाने वाले निजी रिश्ते अब खत्म हो चुके हैं। बोल्टन ने चेतावनी दी कि किसी भी विश्व नेता को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि ट्रंप के साथ उनकी व्यक्तिगत दोस्ती उन्हें उनकी अनिश्चित और अस्थिर विदेश..
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कभी बेहद नजदीकी माने जाने वाले निजी रिश्ते अब खत्म हो चुके हैं। बोल्टन ने चेतावनी दी कि किसी भी विश्व नेता को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि ट्रंप के साथ उनकी व्यक्तिगत दोस्ती उन्हें उनकी अनिश्चित और अस्थिर विदेश नीति से बचा सकती है।
व्यक्तिगत रिश्तों पर आधारित कूटनीति
ब्रिटिश मीडिया एलबीसी से बातचीत में बोल्टन ने कहा, “ट्रंप का मोदी से व्यक्तिगत स्तर पर अच्छा रिश्ता था। लेकिन अब वह बीती बात हो चुकी है। यह सभी नेताओं के लिए एक सबक है।”
बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नेताओं के साथ अपनी व्यक्तिगत समीकरणों के चश्मे से देखते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर ट्रंप का व्लादिमीर पुतिन से रिश्ता अच्छा है, तो वह मान लेते हैं कि अमेरिका-रूस संबंध भी अच्छे हैं। जबकि असलियत में ऐसा नहीं होता।”
भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ सकता है असर
ट्रंप और मोदी की दोस्ती एक समय पर भारत-अमेरिका रिश्तों का आधार मानी जाती थी। दोनों नेताओं के बीच साझा राष्ट्रवादी दृष्टिकोण और मजबूत नेतृत्व की छवि ने उन्हें एक-दूसरे के करीब लाया था। ट्रंप ने कई मौकों पर मोदी को “ग्रेट फ्रेंड” कहा और अहम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी जमकर तारीफ की थी।
लेकिन बोल्टन के मुताबिक, अब यह निजी रिश्ता भी भारत को अमेरिका की बदलती भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं और नीतिगत दबावों से नहीं बचा पाएगा। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में सबसे तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के दौरान उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) और भारत की व्यापारिक नीतियों पर सार्वजनिक आलोचना ने पहले ही रिश्तों में खटास डाल दी थी।
अन्य नेताओं के लिए चेतावनी
बोल्टन ने साफ कहा कि चाहे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर हों या कोई और विश्व नेता, सभी को यह समझ लेना चाहिए कि ट्रंप से निजी निकटता स्थायी सुरक्षा नहीं देती।
उन्होंने कहा, “यह सबके लिए सबक है कि अच्छा व्यक्तिगत रिश्ता कभी-कभी मददगार हो सकता है, लेकिन यह आपको उनके सबसे बुरे फैसलों से नहीं बचा सकता।”
“अमेरिका फर्स्ट” नीति और अस्थिरता
बोल्टन लंबे समय से ट्रंप की विदेश नीति के आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के कारण पारंपरिक कूटनीतिक मानदंडों को दरकिनार कर दिया गया। उनकी नीति अक्सर लेन-देन आधारित, तात्कालिक और कई बार अप्रत्याशित रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोल्टन की टिप्पणी सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए एक संकेत है जो मानते हैं कि ट्रंप की व्यक्तिगत दोस्ती उन्हें भविष्य में संभावित राजनीतिक और आर्थिक झटकों से बचा सकती है।
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