ट्रंप का नया आदेश: एच-1बी वीज़ा पर सालाना $100,000 शुल्क, भारतीयों पर सबसे गंभीर असर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 19 सितंबर को एक नया कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी किया, जिसके तहत अब हर एच-1बी वीज़ा याचिका पर सालाना $100,000 (करीब ₹83 लाख) का आवेदन शुल्क लगेगा। यह शुल्क नई याचिकाओं और पूरक याचिकाओं दोनों पर लागू..
नयी दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 19 सितंबर को एक नया कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी किया, जिसके तहत अब हर एच-1बी वीज़ा याचिका पर सालाना $100,000 (करीब ₹83 लाख) का आवेदन शुल्क लगेगा। यह शुल्क नई याचिकाओं और पूरक याचिकाओं दोनों पर लागू होगा।
यह कदम एच-1बी वीज़ा प्रक्रिया में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है और इसका सबसे गंभीर असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि एच-1बी वीज़ा धारकों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
आदेश के मुख्य प्रावधान
- एच-1बी वीज़ा आवेदकों को हर साल $100,000 शुल्क चुकाना अनिवार्य।
- यह नियम नई याचिकाओं और मौजूदा वीज़ा से जुड़ी अतिरिक्त याचिकाओं दोनों पर लागू होगा।
- नियोक्ताओं (employers) को शुल्क भुगतान का प्रमाण रखना होगा।
- विदेश मंत्रालय और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग शुल्क का सत्यापन करेंगे।
- शुल्क न चुकाने पर आवेदन सीधे खारिज हो जाएगा।
- अपवाद केवल राष्ट्रीय हित (national interest) के मामलों में मिल सकता है।
भारतीयों पर विशेष प्रभाव
- हाल के वर्षों में एच-1बी वीज़ा धारकों में 71% भारतीय रहे हैं, जबकि दूसरे स्थान पर चीन है।
- दो मुख्य समूह प्रभावित होंगे:
- अमेरिकी आईटी कंपनियों में कार्यरत भारतीय पेशेवर।
- अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मास्टर्स और पीएचडी पूरी करने वाले भारतीय छात्र।
- एच-1बी वीज़ा धारकों में से लगभग 65% STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जिनमें अधिकतर कंप्यूटर संबंधित नौकरियां हैं।
- एच-1बी वीज़ा धारकों की औसत वार्षिक आय $118,000 है, लेकिन नए शुल्क की तुलना में यह कम पड़ सकती है।
मध्यम और शुरुआती स्तर के पेशेवरों के लिए चुनौती
- $100,000 का शुल्क मिड-लेवल और एंट्री-लेवल प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है।
- भारतीय छात्रों और हाल ही में स्नातक बने युवाओं को करियर की शुरुआत में ही यह शुल्क चुकाना कठिन होगा।
- इससे अमेरिका में नौकरी के अवसर सीमित हो सकते हैं और नए पेशेवरों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
प्रशासन का तर्क बनाम आलोचना
- ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के लिए है।
- अधिकारियों के अनुसार, ऊँचा शुल्क कंपनियों को मजबूर करेगा कि वे विदेशी कर्मचारियों को केवल तभी नियुक्त करें जब वास्तव में उनकी ज़रूरत हो।
- आलोचकों का मानना है कि इतना अधिक शुल्क अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत और चीन से आने वाली प्रतिभा पर निर्भरता अधिक है।
एच-1बी प्रोग्राम और भविष्य पर असर
- अमेरिका हर साल 85,000 एच-1बी वीज़ा लॉटरी प्रणाली के जरिए जारी करता है।
- नया शुल्क नियम मौजूदा और भावी वीज़ा धारकों को आर्थिक रूप से कठिनाई में डाल सकता है।
- यदि नियोक्ता यह शुल्क भरने से इनकार करते हैं, तो कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है और उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।
- भारतीय छात्रों और स्नातकों के लिए अमेरिका में रहकर नौकरी पाना और कठिन हो जाएगा।
- एच-1बी वीज़ा को अक्सर ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) की ओर पहला कदम माना जाता है, लेकिन ऊँचे शुल्क से यह रास्ता अब मुश्किल हो सकता है।
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