ट्रंप टैरिफ पर फैसला टला: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की देरी से भारतीय बाजारों पर दबाव, अनिश्चितता बढ़ी
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (शुल्क) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं सुनाया। इस बहुप्रतीक्षित निर्णय के टलने से दुनिया भर के निवेशकों में अनिश्चितता बनी रही..
वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (शुल्क) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं सुनाया। इस बहुप्रतीक्षित निर्णय के टलने से दुनिया भर के निवेशकों में अनिश्चितता बनी रही। भारत में भी हालिया सत्रों में शेयर बाजार लगातार दबाव में हैं। संभावित अमेरिकी टैरिफ कार्रवाई, विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली और भारत–अमेरिका व्यापार वार्ताओं में प्रगति न होने से बेंचमार्क सूचकांक नुकसान बढ़ाते नजर आए।
अमेरिकी न्यायाधीशों ने मौजूदा सत्र का पहला विस्तृत फैसला जारी किया, लेकिन साथ ही संकेत दिया कि अवकाश के बाद अगले दो हफ्तों में और भी फैसले आ सकते हैं। ट्रंप टैरिफ से जुड़े मामले पर निर्णय न आने से खासतौर पर उन बाजारों में अनिश्चितता ऊंची बनी रही, जो अमेरिकी व्यापार नीति के संकेतों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। निवेशकों की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी थीं, क्योंकि इसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले टैरिफ पर भी हो सकता है।
मामला 1977 के एक आपातकालीन कानून के तहत ट्रंप द्वारा अधिकांश आयात पर 10 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने से जुड़ा है। इसमें चीन, कनाडा और मैक्सिको से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क, साथ ही भारत जैसे व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार को प्रभावित करने वाले ऊंचे टैरिफ भी शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने इन कदमों को व्यापार असंतुलन, राष्ट्रीय सुरक्षा और फेंटानिल तस्करी जैसी चिंताओं के आधार पर उचित ठहराया था। निचली अदालतों ने माना है कि ट्रंप ने इस कानून के तहत अपनी शक्तियों की सीमा पार की, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितता से भारतीय शेयर बाजार पर असर, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
भारत में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता के साथ शेयर बाजारों में तेज सुधार (करेक्शन) देखा गया है। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए और पिछले तीन महीनों से अधिक की अवधि में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। बीते पांच सत्रों में बेंचमार्क सूचकांक करीब 2.5 प्रतिशत टूट चुके हैं, जबकि इसी अवधि में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 15 लाख करोड़ रुपये घट गया है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात-उन्मुख सेक्टर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। ट्रंप द्वारा भारत के रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का हवाला देने के बाद भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था, जिससे इन सेक्टरों पर दबाव और बढ़ गया।
विश्लेषकों ने चेताया है कि भले ही अदालत टैरिफ के खिलाफ फैसला दे दे, फिर भी अनिश्चितता तुरंत खत्म नहीं होगी। बाजार जानकारों के अनुसार, फैसला न आने से निर्यात-आधारित कंपनियों पर बना दबाव लंबे समय तक रह सकता है, क्योंकि शुल्क फिलहाल लागू रहेंगे और राष्ट्रपति की टैरिफ शक्तियों को लेकर स्पष्टता आगे खिसक गई है।
अमेरिकी टैरिफ पर स्पष्टता का इंतजार और लंबा
कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट अंततः टैरिफ को रद्द भी कर देता है, तब भी अमेरिकी प्रशासन व्यापारिक दबाव बनाए रखने के लिए वैकल्पिक नीतिगत या विधायी रास्ते तलाश सकता है। उनके मुताबिक, वास्तविक राहत अदालत के फैसले से कम और भारत–अमेरिका के बीच बातचीत के जरिए टैरिफ वापस लेने से ज्यादा मिल सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह मामला तात्कालिक राहत से अधिक, अमेरिकी टैरिफ शक्तियों की सीमा को लेकर भविष्य में मिलने वाली स्पष्टता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जब तक या तो कोई स्पष्ट न्यायिक फैसला नहीं आता या भारत–अमेरिका वार्ता के जरिए टैरिफ में औपचारिक कटौती नहीं होती, तब तक निर्यात से जुड़े कारोबार और समग्र निवेश धारणा कमजोर बनी रह सकती है।
वैश्विक बाजारों ने भी इस टालमटोल पर सतर्क प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के अधिकांश आयात शुल्क पर फैसला न सुनाए जाने के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों ने शुरुआती बढ़त गंवा दी। न्यूयॉर्क में मध्य सत्र तक S&P 500 में 0.2 प्रतिशत की बढ़त रही, नैस्डैक 100 में 0.3 प्रतिशत की तेजी दिखी, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग स्थिर रहा।
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