उत्तराखंड सरकार ने 173 से अधिक मदरसों को किया बंद; मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले.. ‘ऐतिहासिक कदम’

उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर में 173 से अधिक मदरसों को सील कर दिया है, जिसका मुख्य कारण मदरसा बोर्ड या शिक्षा विभाग से पंजीकरण न होना बताया गया है।

उत्तराखंड सरकार ने 173 से अधिक मदरसों को किया बंद; मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले.. ‘ऐतिहासिक कदम’
16-04-2025 - 01:08 PM

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर में 173 से अधिक मदरसों को सील कर दिया है, जिसका मुख्य कारण मदरसा बोर्ड या शिक्षा विभाग से पंजीकरण न होना बताया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई को एक "ऐतिहासिक कदम" बताया है और कहा कि इसका उद्देश्य उन संस्थानों पर रोक लगाना है जो शिक्षा की आड़ में कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं।

यह कार्रवाई उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से अनुमति प्राप्त न करने वाले अवैध और अपंजीकृत मदरसों के खिलाफ की गई है, जिनमें से अधिकतर सीमा से लगे जिलों में स्थित हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश अवैध मदरसे देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में पाए गए। ये मदरसे पंजीकरण, भवन अनुमति और आवश्यक शैक्षिक मानकों के बिना ही संचालित हो रहे थे।

इसके अलावा, अधिकारियों ने दावा किया कि कुछ मदरसे संदिग्ध गतिविधियों” के चलते जांच के घेरे में भी थे।

  • उधम सिंह नगर में सबसे अधिक 67 अवैध मदरसे सील किए गए।
  • हरिद्वार में 44 मदरसों पर कार्रवाई हुई।
  • देहरादून में भी 44 मदरसे बंद किए गए।
  • अन्य जिलों में: नैनीताल में 19, पौड़ी में 2, और अल्मोड़ा में 1 मदरसा सील किया गया।

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून क़ासमी ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि

रविवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 13 अवैध मदरसों को सील किया गया। इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी अवैध मदरसों के खिलाफ अभियान चलाया गया।”

उन्होंने कार्रवाई के पीछे के कारण स्पष्ट करते हुए कहा, “जिन मदरसों पर कार्रवाई की गई, उन्होंने न तो भवन निर्माण की अनुमति ली थी और न ही शैक्षणिक मान्यता अथवा सुरक्षा मानकों को पूरा किया था।”

मुफ्ती शमून क़ासमी ने कहा कि हमारा उद्देश्य मदरसों में सुधार कर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है ताकि वे संस्कारी और सर्वांगीण व्यक्तित्व के रूप में विकसित हो सकें। हम मदरसा शिक्षा का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं, जिसमें NCERT पाठ्यक्रम लागू करना और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि सरकार की समावेशी विकास की सोच के अनुरूप शिक्षा प्रणाली तैयार की जा सके।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।