दिग्गज अभिनेत्री कुमुदिनी ‘कामिनी कौशल’ का 98 वर्ष की उम्र में निधन, सिने जगत में शोक की लहर
हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की प्रतिष्ठित अभिनेत्री कामिनी कौशल का गुरुवार रात मुंबई स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं। परिवार ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए निजता की अपील की है। वह अपने पुत्रों श्रवण, विदुर और राहुल सूद को पीछे छोड़..
मुंबई। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की प्रतिष्ठित अभिनेत्री कामिनी कौशल का गुरुवार रात मुंबई स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 98 वर्ष की थीं। परिवार ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए निजता की अपील की है। वह अपने पुत्रों श्रवण, विदुर और राहुल सूद को पीछे छोड़ गई हैं।
लाहौर में जन्म, ‘नीचा नगर’ से मिली पहचान
1927 में लाहौर में उमा कश्यप के रूप में जन्मीं कामिनी कौशल ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत चेतन आनंद की ऐतिहासिक फिल्म ‘नीचा नगर’ (1946) से की जो कान्स फिल्म फेस्टिवल में पाम डी’ ओर जीतने वाली भारत की पहली और एकमात्र फिल्म है।
स्वर्णिम दौर की सुपरस्टार
1940 और 1950 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की प्रमुख नायिकाओं में से एक रहीं। उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं..
- दो भाई (1947)
- शहीद (1948)
- जिद्दी (1948)
- नदिया के पार (1948)
- बिराज बहू (1954) — जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला
- बड़े सरकार (1957)
- गोदान (1963)
बाद के वर्षों में उन्होंने सहजता से चरित्र भूमिकाओं की ओर रुख किया और नई पीढ़ियों के बीच भी लोकप्रिय रहीं। वह हाल के वर्षों में कबीर सिंह (2019) और लाल सिंह चड्ढा (2022) जैसी फिल्मों में भी दिखाई दीं जिससे वह उन दुर्लभ कलाकारों में शामिल हो गईं जो कई पीढ़ियों तक प्रासंगिक रहीं।
जीवन के फैसले: जिम्मेदारी को चुना, प्रेम को त्यागा
अपने व्यक्तिगत जीवन में भी कामिनी कौशल ने कई कठिन फैसले लिये। अपने जीजा से विवाह करने के बाद उन्होंने अपनी बहन के बच्चों की परवरिश को प्राथमिकता दी और प्रेम संबंधों से दूर रहने का कठिन निर्णय लिया।
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन का भावुक श्रद्धांजलि संदेश
उनके निधन पर फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन (FHF) ने गहरा शोक व्यक्त किया। FHF ने कहा, “हम कामिनी कौशल जी के निधन से गहरे दुखी हैं। ‘नीचा नगर’ की नायिका और स्वर्णिम युग की श्रेष्ठ अभिनेत्रियों में शामिल कामिनी जी हमारी स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेंगी। उन्होंने अपना अमूल्य निजी संग्रह हमारे आर्काइव को दान किया था, यह हमारे लिए गर्व की बात है।”
FHF ने यह भी कहा कि उनके साथ रिकॉर्ड की गई विस्तृत मौखिक इतिहास श्रृंखला और उनकी उत्सुकता, विद्वता व जीवन के प्रति जिज्ञासा हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगी।
सिनेमा जगत में शोक
कामिनी कौशल सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं बल्कि भारतीय सिनेमा की एक चलती-फिरती विरासत थीं—बौद्धिक, संवेदनशील और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व की मिसाल। उनके निधन के साथ हिंदी फिल्म उद्योग का एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया। दन्यूजठिकाना परिवार की ओर से कामिनी कौशल को विनम्र श्रद्धांजलि।
What's Your Reaction?