'मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश मिला था': मालेगांव विस्फोट पर पूर्व ATS अधिकारी का बड़ा खुलासा.. 'भगवा आतंक की थ्योरी गढ़ने की कोशिश थी'

साल 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों की रिहाई के बाद, महाराष्ट्र एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज दावा किया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश..

'मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश मिला था': मालेगांव विस्फोट पर पूर्व ATS अधिकारी का बड़ा खुलासा.. 'भगवा आतंक की थ्योरी गढ़ने की कोशिश थी'
01-08-2025 - 09:35 AM

मुंबई। साल 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों की रिहाई के बाद, महाराष्ट्र एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज दावा किया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश मिला था, ताकि "भगवा आतंकवाद" की थ्योरी को स्थापित किया जा सके।

सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर मेहबूब मुझावर, जो शुरुआती जांच में ATS टीम का हिस्सा थे, ने कहा कि "अदालत का फैसला उन झूठी बातों को खत्म करता है, जो ATS ने की थीं।" उन्होंने कहा कि यह फैसला "झूठी जांच और एक झूठे अधिकारी" को उजागर करता है, हालांकि उन्होंने संबंधित वरिष्ठ अधिकारी का नाम लिया।

'ऐसे आदेश दिए गए जो मानवीय नहीं थे'

मुझावर ने कहा,"मैं यह नहीं कह सकता कि ATS ने उस समय कैसी जांच की और क्यों की... लेकिन मुझे कुछ गोपनीय आदेश दिए गए थे, जिनमें रामजी कालसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत जैसे नाम शामिल थे।"

उन्होंने आगे कहा कि "ये आदेश ऐसे थे जिन्हें एक सामान्य पुलिस अधिकारी के लिए पालन करना असंभव था।" उन्होंने कहा कि इन आदेशों को न मानने की कीमत उन्हें अपने पूरे 40 साल के करियर से चुकानी पड़ी, और उन पर झूठा मामला दर्ज कर दिया गया।

'भगवा आतंकवाद सिर्फ एक झूठ था'

मुझावर ने दो टूक कहा,"कोई भगवा आतंकवाद नहीं था। यह सब कुछ फर्जी था।" उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास दस्तावेज़ी सबूत हैं, जो उनके इन बयानों को साबित कर सकते हैं।

 

'भागवत जैसे बड़े नेता को गिरफ्तार करना मेरी सीमा के बाहर था'

मेहबूब मुझावर ने याद करते हुए कहा,"मोहन भागवत जैसी उच्चस्तरीय और प्रतिष्ठित शख्सियत को गिरफ्तार करना मेरी शक्ति और सीमा से बाहर था।" उन्होंने कहा, "मैंने जब आदेश नहीं माने तो मेरे खिलाफ एक झूठा मामला बना दिया गया और मेरा करियर तबाह कर दिया गया।"

पृष्ठभूमि: 2008 मालेगांव विस्फोट मामला

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 घायल हुए थे। शुरुआती जांच महाराष्ट्र ATS ने की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह एक दक्षिणपंथी संगठन 'अभिनव भारत' द्वारा रची गई साजिश थी।
बाद में यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।

गुरुवार (1 अगस्त 2025) को विशेष NIA अदालत ने सबूतों की कमी और गवाहों के बयान बदलने के आधार पर सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित शामिल थे।

टिप्पणी

पूर्व ATS अधिकारी मुझावर के इस बयान ने मालेगांव मामले में राजनीतिक षड्यंत्र और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनके आरोपों के अनुसार, भगवा आतंकवाद का नैरेटिव जबरन गढ़ने की कोशिश की गई थी, और इसके लिए बिना साक्ष्य शीर्ष नेताओं को फंसाने का दबाव डाला गया।

अब देखना यह है कि मुझावर के इन गंभीर और संवेदनशील आरोपों पर सरकार या एजेंसियां क्या प्रतिक्रिया देती हैं, और क्या किसी जांच या कार्रवाई की सिफारिश होती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।