'हम सहमत हुए हैं...': ट्रंप के टैरिफ से बाजारों में मचे तूफान के बीच जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से की बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (शुल्क) से जब वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से टेलीफोन पर बातचीत की।
नयी दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (शुल्क) से जब वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से टेलीफोन पर बातचीत की।
जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच इंडो-पैसिफिक, भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया और कैरिबियन क्षेत्रों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही, दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को शीघ्र अंतिम रूप देने पर भी बातचीत हुई, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हुए।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच फिलहाल द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही है। दोनों सरकारें इस समझौते के ढांचे को तैयार करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार विस्तार, बाज़ार पहुंच में सुधार, और टैरिफ तथा गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस साल फरवरी में अमेरिका यात्रा के दौरान भी इस बात पर बल दिया गया था कि दोनों देश एक "पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय" व्यापार समझौते पर बातचीत के इच्छुक हैं।
भारत में दलाल स्ट्रीट पर खूनखराबा
सोमवार को दुनिया भर के शेयर बाजारों में 'खूनखराबा' (bloodbath) देखने को मिला, जिसका कारण था ट्रंप द्वारा घोषित ‘लिबरेशन डे टैरिफ़’।
अमेरिका ने सभी आयातों पर 10% का आधार टैरिफ लगाया है, जबकि 60 देशों या व्यापारिक ब्लॉकों, जिनका अमेरिका के साथ व्यापार घाटा ज्यादा है, उनके लिए दरें और भी अधिक रखी गई हैं।
2 अप्रैल को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में टैरिफ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा था कि "भारत बहुत-बहुत सख्त देश है", और भारत अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर 52% तक टैरिफ वसूलता है। हालांकि, ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "अपने अच्छे मित्र" भी कहा। अमेरिका ने भारत पर "डिस्काउंटेड" यानी रियायती 26% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है।
इस घोषणा का वैश्विक बाजारों पर जबरदस्त असर पड़ा। भारत में BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी में एक साल की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां सेंसेक्स 3000 से अधिक अंक गिरा और निफ्टी 22,000 के स्तर से नीचे आ गया।
इस भारी गिरावट में निवेशकों को करीब ₹12 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
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