"उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह चरमरा चुका है": सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जब उसने राज्य पुलिस द्वारा निजी (सिविल) मामलों में एफआईआर दर्ज करने के कई मामलों को देखा तो उसे लगा कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह टूट चुका है।
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जब उसने राज्य पुलिस द्वारा निजी (सिविल) मामलों में एफआईआर दर्ज करने के कई मामलों को देखा तो उसे लगा कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह टूट चुका है।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार तथा के वी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में गौतम बुद्ध नगर जिले के सेक्टर-39 थाने के थाना प्रभारी (SHO) और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को यह निर्देश दिया कि वे शपथ-पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि एक सिविल विवाद में आपराधिक कानून कैसे लागू किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह से चरमरा गया है। एक सिविल मामले को आपराधिक मामला बना देना स्वीकार्य नहीं है।"
पीठ तब नाराज़ हो गई जब एक वकील ने कहा कि "नागरिक मुकदमे में फैसला आने में लंबा समय लगता है इसलिए एफआईआर दर्ज की गई।"
CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “यह बहुत गलत हो रहा है यूपी में। रोज़ाना सिविल विवादों को आपराधिक मामले में बदला जा रहा है। यह हास्यास्पद है। सिर्फ पैसा न देना कोई अपराध नहीं बनता।”
“हम जांच अधिकारी (IO) को गवाह के बॉक्स में खड़ा करेंगे। जांच अधिकारी कोर्ट में खड़ा होकर बताए कि यह कैसे आपराधिक मामला है... इस तरह चार्जशीट दाखिल करना स्वीकार नहीं है। उसे एक सबक सिखाना ज़रूरी है।”
पीठ ने यह भी पूछा, “सिर्फ इसलिए कि सिविल केस में समय लगता है, क्या आप एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कानून लागू कर देंगे?”
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सेक्टर-39 थाने के जांच अधिकारी (IO) को ट्रायल कोर्ट में गवाह के रूप में पेश होकर यह स्पष्ट करना होगा कि एफआईआर दर्ज करना क्यों उचित था।
यह सुनवाई एक याचिका पर हो रही थी जिसे आरोपी डेबू सिंह और दीपक सिंह ने वकील चांद कुरैशी के माध्यम से दाखिल किया था। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक मामला खारिज करने से इनकार करने के खिलाफ थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नोएडा की ट्रायल कोर्ट में इन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। हालांकि, चेक बाउंस (धारा 138) का मामला चलता रहेगा।
नोएडा में इन दोनों पर IPC की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 506 (आपराधिक धमकी), और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
What's Your Reaction?