‘दूध पिलाई’ रस्म क्या है? वायरल वीडियो से छिड़ी सहमति और संस्कृति पर बहस

हाल ही में एक शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ‘दूध पिलाई’ रस्म को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। यह वीडियो आईपीएस अधिकारी KK Bishnoi और Anshika Verma की शादी का बताया जा रहा है, जिसमें दूल्हे को यह पारंपरिक रस्म निभाते हुए देखा..

‘दूध पिलाई’ रस्म क्या है? वायरल वीडियो से छिड़ी सहमति और संस्कृति पर बहस
02-04-2026 - 09:04 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

हाल ही में एक शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ‘दूध पिलाई’ रस्म को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। यह वीडियो आईपीएस अधिकारी KK Bishnoi और Anshika Verma की शादी का बताया जा रहा है, जिसमें दूल्हे को यह पारंपरिक रस्म निभाते हुए देखा गया।

क्या है ‘दूध पिलाई’ रस्म?

दूध पिलाई’ राजस्थान की एक पारंपरिक रस्म है, जो बारात निकलने से ठीक पहले होती है। इस दौरान दूल्हे की मां उसे अपने आंचल या पल्लू के नीचे लेकर दूध पिलाती है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ मिनटों की होती है, लेकिन इसका भावनात्मक महत्व बहुत गहरा होता है।

इस रस्म का मूल भाव है — मां के दूध की लाज रखना”, यानी अपने परिवार और संस्कारों का सम्मान बनाए रखना। इसे धार्मिक आदेश से ज्यादा एक भावनात्मक विदाई के रूप में देखा जाता है, जहां मां अपने बेटे को जीवन के नए चरण में प्रवेश करने से पहले आशीर्वाद देती है।

यह परंपरा केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान के ब्राह्मण, राजपूत, जाट, विश्नोई और कुम्हार समाजों में लंबे समय से चली आ रही है। इसके समान रूप हरियाणा, बिहार और नेपाल के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिलते हैं।

वायरल वीडियो पर विवाद क्यों?

चूंकि दूल्हे KK Bishnoi एक आईपीएस अधिकारी हैं, इसलिए इस वीडियो ने ज्यादा ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे “पिछड़ी सोच” और “महिला विरोधी परंपरा” करार दिया।

कुछ यूजर्स का कहना था कि एक उच्च शिक्षित और जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसी रस्म निभाना समाज में गलत संदेश देता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे जातिवाद और सामाजिक ढांचे से भी जोड़कर देखा।

क्या आलोचना सही है?

इस रस्म को लेकर एक पक्ष का मानना है कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ‘दूध पिलाई’ कोई वास्तविक स्तनपान नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक और सार्वजनिक आशीर्वाद की परंपरा है।

समर्थकों का तर्क है कि हर संस्कृति में कई रस्में होती हैं, जिनका बाहरी लोगों को पूरा संदर्भ नहीं पता होता। ऐसे में किसी एक परंपरा को अलग करके आलोचना करना सही नहीं है।

असली मुद्दा: सहमति (Consent) और सोशल मीडिया

इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है — सहमति

जब कोई निजी और भावनात्मक रस्म कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल होती है, तो वह अपने मूल संदर्भ से बाहर निकल जाती है। परिवार के लिए जो एक निजी क्षण होता है, वह इंटरनेट पर बहस और मीम का विषय बन जाता है।

यह सवाल उठता है कि क्या उस वीडियो में शामिल सभी लोगों ने इसे सार्वजनिक करने की सहमति दी थी? खासकर मां जैसे किरदार, जो किसी दर्शक के लिए नहीं बल्कि अपने बेटे के लिए यह रस्म निभा रही होती हैं।

संस्कृति बनाम आधुनिक सोच

भारतीय शादियां सिर्फ समारोह नहीं बल्कि संस्कृति और परंपराओं का जीवंत रूप होती हैं। इनमें कई रस्में समय के साथ बदलती हैं, कुछ खत्म हो जाती हैं और कुछ पर सवाल उठते हैं।

जब कोई सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी परंपरा का पालन करता है, तो उस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि हम निजी पलों की गरिमा, सहमति और सांस्कृतिक संदर्भ का सम्मान करें।

निष्कर्ष:
दूध पिलाई’ रस्म पर विवाद सिर्फ एक परंपरा का नहीं, बल्कि उस तरीके का है जिससे आज के डिजिटल दौर में निजी जीवन को सार्वजनिक बहस में बदल दिया जाता है। असली चुनौती यही है कि हम संस्कृति और सहमतिदोनों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।