जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कौन हैं? केजरीवाल ने एक्साइज केस से हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) मामले में सुनवाई कर रहीं Swarana Kanta Sharma को केस से हटाने की मांग को लेकर Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया..
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) मामले में सुनवाई कर रहीं Swarana Kanta Sharma को केस से हटाने की मांग को लेकर Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल चाहते हैं कि यह मामला Delhi High Court में किसी अन्य जज को ट्रांसफर किया जाए। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya ने उनकी यह मांग खारिज कर दी थी।
फिलहाल आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में चल रही है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कौन हैं?
शिक्षा
Swarana Kanta Sharma दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश हैं।
- उन्होंने University of Delhi से इंग्लिश लिटरेचर में बीए (ऑनर्स) किया।
- इसके बाद 1991 में एलएलबी और 2004 में एलएलएम की डिग्री हासिल की।
- उनके पास मार्केटिंग मैनेजमेंट, एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस में डिप्लोमा भी है।
2025 में उन्होंने चार साल के शोध के बाद “Achieving Constitutional Vision of Justice Through Judicial Education” विषय पर पीएचडी प्राप्त की। इसमें ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर और कनाडा की न्यायिक शिक्षा प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
न्यायिक करियर
- 24 साल की उम्र में वे मजिस्ट्रेट बनीं।
- 35 साल की उम्र में सेशन जज बनीं।
- 28 मार्च 2022 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
जिला अदालतों में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें शामिल हैं..
- स्पेशल जज (CBI)
- प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल
- महिला कोर्ट
- महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत
वह एक प्रशिक्षित ज्यूडिशियल मेडिएटर भी हैं और कई मामलों को मध्यस्थता के जरिए सुलझा चुकी हैं।
समितियों और प्रशासनिक भूमिकाएं
उन्होंने तीस हजारी, पटियाला हाउस और रोहिणी कोर्ट में महिला कर्मचारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की जांच करने वाली समितियों की अध्यक्षता भी की।
नवंबर 2019 में उन्हें प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) बनाया गया था।
मार्च 2022 में उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-cum-स्पेशल जज (CBI) का पद संभाला।
लेखिका भी हैं जस्टिस शर्मा
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कई किताबें भी लिख चुकी हैं, जिनका उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
उनकी प्रमुख किताबें हैं:
- Don’t Break After Break-Up – रिश्तों में टूटन के बाद महिलाओं को मार्गदर्शन
- Beyond Baghban – वरिष्ठ नागरिकों की भावनात्मक और आर्थिक समस्याएं
- Tumhari Sakhi – महिलाओं के अधिकार और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने पर केंद्रित
- Love Full Circle – एक फिक्शन किताब
- Judicial Education – Achieving Constitutional Vision of Justice – न्यायिक शिक्षा के महत्व पर आधारित
केजरीवाल उन्हें केस से हटाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
केजरीवाल ने 11 मार्च को लिखे पत्र में कहा कि यदि मामला इसी जज के पास रहा तो उन्हें आशंका है कि सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष और तटस्थ नहीं हो सकती।
9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें आबकारी नीति मामले की जांच करने वाले Central Bureau of Investigation (CBI) अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत देने के दौरान की गई कुछ टिप्पणियां पहली नजर में गलत लगती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका
केजरीवाल ने अब Supreme Court of India में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है।
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