बिहार में कांग्रेस क्यों बिखर गई? लोकसभा सांसद तारिक अनवर ने उठाई इस विवादित नियुक्ति पर उंगली

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) का हिस्सा होते हुए भी 61 में से सिर्फ 6 सीटें जीत पाई, यह पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीटें जीतकर विपक्ष को लगभग साफ कर ..

बिहार में कांग्रेस क्यों बिखर गई? लोकसभा सांसद तारिक अनवर ने उठाई इस विवादित नियुक्ति पर उंगली
19-11-2025 - 08:19 PM

नयी दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) का हिस्सा होते हुए भी 61 में से सिर्फ 6 सीटें जीत पाई, यह पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीटें जीतकर विपक्ष को लगभग साफ कर दिया। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। महागठबंधन मात्र 35 सीटों पर सिमट गया।

लेकिन, कांग्रेस की इतनी खराब हार की वजह क्या रही? कई नेता अलग-अलग कारण गिनाते रहे, जबकि राहुल गांधी ने इस नतीजे को “चौंकाने वाला” बताते हुए कहा कि चुनाव शुरुआत से निष्पक्ष नहीं था।”

तारिक अनवर का बड़ा आरोप: ‘गलत नियुक्ति ने पूरा खेल बिगाड़ा’
कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने पार्टी की हार का मुख्य कारण बताया—कृष्णा अल्लावरू को बिहार प्रभारी बनाया जाना।
उन्होंने कहा, मुझे शुरू से ही डर था। बिहार को न जानने वाला, जिसने कभी चुनाव नहीं लड़ा, जिसे राज्य की ज़मीन की कोई समझ नहीं उसे प्रभारी बनाना शुरू से ही गलत फैसला था। जब शुरुआत गलत हो, तो अंत कैसे ठीक हो सकता है?”

अनवर ने कहा कि अल्लावरू का काम करने का तरीका ठीक नहीं था और इस फैसले ने चुनावी रणनीति पर बुरा असर डाला।

कौन हैं कृष्णा अल्लावरू?
अल्लावरू आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और राजनीति में आने से पहले KPMG और Shaadi.com जैसी निजी कंपनियों में कंसल्टेंट के रूप में काम कर चुके हैं।
2010
में कांग्रेस में शामिल हुए और माना जाता है कि वे राहुल गांधी के बेहद करीबी हैं। फरवरी में उन्हें मोहन प्रकाश की जगह कांग्रेस का बिहार प्रभारी नियुक्त किया गया था।

अनवर ने टिकट चयन पर भी सवाल उठाए और कहा,आपको लोकप्रिय और ज़मीनी उम्मीदवार चाहिए होते हैं। कुल मिलाकर टिकट चयन त्रुटिपूर्ण था।”

बिहार में कांग्रेस की लगातार गिरावट
स्वतंत्रता के बाद शुरुआती तीन दशकों तक कांग्रेस बिहार की प्रमुख शक्ति रही और 1947 से 1967 तक राज्य पर एकछत्र शासन किया।
1980
के दशक में सत्ता में वापसी के बाद 1990 में लालू प्रसाद यादव के उदय ने कांग्रेस का जनाधार कमजोर कर दिया।
समय के साथ पार्टी का संगठन टूटता गया, जबकि RJD, JDU और अब BJP जैसे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल मजबूत होते गए। कांग्रेस ने 2015 में 27 और 2020 में 19 सीटें जीती थीं। साल 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई।

अंदरूनी कलह और राहुल गांधी की सीमित भागीदारी
अगस्त की यात्रा के बाद राहुल गांधी लंबे समय तक चुनाव प्रचार से दूर रहे और 29 अक्टूबर को ही वापस मैदान में उतरे।
पार्टी की इस ‘अनुपस्थिति’ ने संगठन में असंतोष बढ़ाया। टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठे और कई पुराने नेता खुले तौर पर विरोध में उतर आए।

पूर्व विधायकों सहित कई असंतुष्ट नेताओं ने चुनाव से पहले प्रदर्शन किया और मांग की कि अल्लावरू को हटाकर किसी ‘राजनीतिक व्यक्ति’ को प्रभारी बनाया जाए।
उन पर यह तक आरोप लगाया गया कि वे “कॉर्पोरेट एजेंट” हैं और “RSS के स्लीपर सेल” की तरह काम कर रहे हैं।

निष्कर्ष
बिहार में कांग्रेस की करारी हार के पीछे कई कारण सामने आते हैं—गलत नियुक्ति, कमजोर संगठन, टिकट वितरण विवाद, शीर्ष नेतृत्व की कम सक्रियता और महागठबंधन के भीतर की असहजता। लेकिन तारिक अनवर के आरोपों ने पार्टी की अंदरूनी कमजोरी को और उजागर कर दिया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।