काशी के रक्षक दुर्ग 'मनहेच' से जफराबाद बनने की दास्तान की ड्रामा डॉक्यूमेंट्री बताएगी काशी के सांस्कृतिक विभाजन की सच्चाई
<p><em>भारत के सांस्कृतिक विभाजन को लेकर कश्मीर फाइल और द केरल स्टोरी के बाद अब जफराबाद स्टोरी फिल्म बन रही है। ज्ञानवापी विश्वेश्वर को समर्पित तकरीबन डेढ़ घंटे की यह ड्रामा डॉक्यूमेंट्री काशी के रक्षक दुर्ग रहे जफराबाद के मनहेच किले और जफराबाद नगर के पुराने इतिहास को प्रस्तुत करने के साथ हिंदू समाज के उस व्यापक संघर्ष को भी प्रस्तुत कर रही है जो जफराबाद और मनहेच किले ने आक्रमणकारी सेनाओं के खिलाफ खड़ा किया। मनहेच किला पूर्वांचल के वीरों का शौर्य केंद्र था और पश्चिमोत्तर सीमा पार से होने वाले हमलों से लड़ने के लिए सदियों सदियों से वज्र की तरह लड़ने वाले योद्धा यहीं से जाते थे ।</em></p> <p><em><img alt="" src="https://www.newsthikana.com/uploads/news/1686753547munhech_3.png" style="height:421px; width:724px" /></em></p>
सन 1321 में जफराबाद को जफर शाह तुगलक और सन 1359 में जौनपुर को फिरोजशाह तुगलक ने पूरी तरह ध्वस्त किया । यहां हिंदू या बौद्ध संस्कृति का कोई भी अवशेष नहीं छोड़ा गया। मंदिरों, महलों और धर्म स्थलों को तोड़कर उन्हीं के पत्थरों से इस्लामी इमारतें तामीर कराई गयीं। जिनकी देव मूर्तियां तोड़ी गयीं उन्हीं से मजदूरी या बेगार करा कर मस्जिदें, मदरसे, दरगाह और खानकाह बनवाए गए। जफराबाद का मनहेच किला तो इतना बड़ा था कि वहां से निकाले गए पत्थरों से जौनपुर और आसपास के इलाकों में 8 बड़े स्थापत्य बनाए गए। मनहेच किले के चारों ओर जल की चौड़ी खाई थी जिससे इस किले को जीतना आसान नहीं था । इस खाई के कुछ अंश आज भी मौजूद हैं।
पुराने नाम की बहाली की मांग
मखदूम संतों के धर्म प्रचार का सहारा लेकर सन 1321 में जफर शाह तुगलक ने मनहेच को जीता। यहां जफर शाह तुगलक की कब्र बनी हुई है। हार हुई लेकिन प्रतिरोध रुका नहीं । काशी की रक्षक सेनाएं शक्तेशगढ़, मिर्जापुर या रोहतास इलाके में फैल कर काशी विश्वेश्वर की रक्षा करती रहीं । जफराबाद स्टोरी इन घटनाओं को सिलसिलेवार दर्ज कर रही है।यह फिल्म जन अभियान के रूप में बनाई जा रही है और उत्तर प्रदेश सरकार और पुरातत्व विभाग से इस किले के संरक्षण और इसके जीर्णोद्धार की मांग की जा रही है । इस मांग के समर्थन में मैनुअल और ऑनलाइन दोनों तरीके से हस्ताक्षर अभियान भी चलाए जा रहे हैं । मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को एक लाख से अधिक लोगों के दस्तखत से यह मांग पत्र जल्द ही सौंपा जाएगा। फिल्म का यह भी सुझाव है कि जफराबाद का नाम बदलकर उसका पुराना नाम मनहेच बहाल किया जाए।
दो दर्जन से ज्यादा पत्रकार, साहित्यकार और प्राध्यापकों का योगदान
यह फ़िल्म मुंबई की सामाजिक संस्था पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा बनाई जा रही है। इसकी संकल्पना पत्रकार ओमप्रकाश की है जिसे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के स्नातक आनंद प्रकाश सिंह निर्देशित कर रहे हैं । फिल्म को संगीत काशी के जाने-माने संगीतज्ञ सुभाष कनौजिया दे रहे हैं। गीतों को डॉ शोमा घोष और कैलाश खेर जैसे जाने-माने गायक स्वर दे रहे हैं। स्थानीय सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए फिल्म को जौनपुर के समाजसेवी नीरज सिंह और जौनपुर जफराबाद के कई अन्य जाने-माने व्यक्तित्व प्रस्तुत कर रहे हैं। कोशिश है कि पूरा जफराबाद और जौनपुर इस फिल्म को प्रस्तुत करे। फिल्म के निर्माण में शिक्षाविद डॉक्टर दौलत सिंह पालीवाल, पत्रकार विश्वनाथ गोकर्ण, समाजसेवी डॉ मुकुल त्रिपाठी, पत्रकार अतुल बिसेन, विकास सिंह, राम जनक सिंह, डॉ अशोक त्रिपाठी, डॉ गोपाल मिश्र सहित तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा पत्रकार, साहित्यकार और प्राध्यापकों का विशेष योगदान है।
फैक्ट्स के लिए राजनीतिज्ञ ओर विशेषज्ञ भी शामिल
फिल्म में राजनीति और समाज के कई विशेषज्ञों के बाइट्स भी शामिल किए गए हैं। घटनाओं के चित्रण के लिए फौजदार सिंह, मारकंडेय सिंह, राम अलम सिंह, अवनीश तिवारी और डॉक्टर बृजेश यदुवंशी जैसे जाने-माने स्थानीय कलाकारों का सहयोग लिया गया है। 30 मई 2023 से 9 जून 2023 तक जफराबाद में की गई शूटिंग में फिल्म निर्माण का लगभग 65 फ़ीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है। 30 जून 2023 से 4 जुलाई 2023 तक जफराबाद में फिल्म की शूटिंग का बाकी काम पूरा किया जाएगा। फिल्म सितंबर 2023 में बनकर तैयार हो जाएगी
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