लो जी आ गयी होली...तो रंग जाइये हमारे साथ मस्त मस्त रंगों की साहित्यिक फुहार में
<p><em>साहित्यिक फुहार भाग 1: लो जी आ गयी होली !!!! हर्ष और उल्लास का पर्व है। किसी से रूठना मानना चल रहा हो तो आज से अच्छा दिन नहीं मिलेगा। इस दिन लोग गिले, शिकवे भूलाकर प्यार का रंग लगाते हैं। दोस्तों आज न्यूज़ ठिकाना में साहित्यिक फुहार से हम भी आपको रंग डालेंगे। और क्या ...बात हो होली की...और न बात हो हमारे कवि ,कवियत्रियों और उनकी बेशकीमती कविताओं की,,,,ये भी कोई बात हुई भला ?</em></p> <p><em>तो चलिए होली की साहित्यिक फुहार......होली हर्षोल्लास को एक बेहतरीन कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत करने करते है।</em></p>
अजमेर ,राजस्थान की कवियत्री डॉ. नीलिमा तिग्गा ने बावरी मस्तानी होली का क्या मस्त वर्णन किया है :
"होकर बावरी मस्तानी होली
झूम रही है गली गली
शिकवे शिकायत आज होठों पर नहीं
मस्ती के नगमों से भरी झोली।
मचल रही फुदक रही रंगों की रानी
बिन पीए मचल रही ये दीवानी
हँसते बतियाते छोटे या बड़े
झूम रहे सब मौसम रूमानी ll
ताऊ की लटकती तोंद चाची का पल्ला
पापा की अचकन, माँ का आँचल संभला
दीदी की चुनरी, भाभी की पायल
धूम मचाते भाई औ दोस्तों का हल्ला ll
रंगों के बेरंगी ढंग दिखाएं बच्चे शरारती
मनचलों की टोली आई मुस्कुराती
अबीर गुलाल या रंगों के गुब्बारे
होली की मस्ती में भांग चढ़ाई जाती ll
होली के तेवर ऐसे ही मनचले
मन की बुराई अग्नि में जले
जलते अगन पे शीतल रंगों की बौछार
मस्ती के तराने उछले उछले ll "
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अगली कविता जिसका शीर्षक है: "होली है भई होली है"
इसे जयपुर से कवियत्री कमलेश शर्मा ने राधा और श्याम की मतवाली होली का क्या खूब बखान किया है ...
" फागुन महीना आया,
रंग पिचकारी लाया,
राधिका ठिठोरी करे,
नवल किशोरी है।
भर भर पिचकारी,
खेलें होरी गिरधारी,
राधा पे गुलाल डाल,
करे जोरा जोरी है।
राधा संग खेलें रंग,
ढोल नगाड़े चंग,
झूम झूम नाच रही,
ब्रज की ये गोरी हैं।
श्याम को नचाय रही,
प्रेम गीत गाय रही,
राधा मन मोह रही,
किया चित चोरी है।
नाचें संग संग देखो
भीग गए रंग में वो
थाप देवें चंग में वो
भीगी सब छोरी हैं।
होरी है भई होरी है
बात हो होली की , और बात न हो बच्चों के धमाल की।। ? कुछ अधूरा सा लगता है ना। जोधपुर ,राजस्थान की कवियत्री डाॅ.नीना छिब्बर की " मच मच होली " पढ़िए जिसमे सारे शैतान बच्चों की टोली किस तरह होली के मज़े उठा रही है :
"खटपट होली,झटपट होली
बच्चों की है मच-मच होली।
चेहरे पर है सजा मुखौटा
आड़ा टेढ़ा ,काला पीला
सींगों वाला बैल बना चीनू
नकली सूंड वाला हाथी पीलू
लंबे खूंखार नकली दाॅंत
लाल नीले पीले सबके बाल
चप्पलें भी है बड़ी अनोखी
कपड़ों ने पी लिया रंग है
मस्ती में हो रहे मलंग हैं
पीठ बनी है पानी की टंकी
हाथों में है लंबी पिचकारी
गुब्बारों से भरा है झोला
टप टपा टप दे धड़ाम
फूट रहे पनीले बम
बच्चे बने हॅसी के फव्वारे
कुता बिल्ली गाय बकरी रंग डालें
हर घर पर छिड़कते रंग मनमाना
रंगे हाथ गुझिया पर डाका
गली मोहल्ला सब रंग डाला
खट पट होली ,झटपट होली
बच्चों की है मच मच होली। "
कवियत्री अर्चना लखोटिया ने आज मनभावन होली के अवसर पे सुन्दर कुंडलियां छन्द भेजे हैं....लें आनंद इस ठंडी सी साहित्यिक फुहार का "
"होली आई देखकर,
खिले किंशुका फूल ।
रंग अबीर गुलाल से,
मन खुशियों से झूल।।
मन खुशियों से झूल,
देख सब अति हर्षाए।
ढोलक पर दे थाप,
सभी जन नाचे गाए।।
यह सतरंगी आभ,
सभी के हिय में डोली।
गाएँ सब मिल फ़ाग,
आज तो आई होली।। "
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