किसी की हार ना किसी की जीत, राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ
<p><em><strong>इस बार 480 बैंचों की स्थापना की गई है, जिनमें लगभग 6 लाख मुकदमों की सुनवाई की जाएगी।</strong></em></p>
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 12 नवंबर शनिवार को वर्ष-2022 की चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत का संपूर्ण राजस्थान में शुभारंभ किया गया। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के मुख्य न्यायाधिपति बिरेंद्र सिंह ने जयपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय के परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का प्रातः 10 बजे शुभारंभ किया।
इस अवसर पर सिंह ने कहा कि जटिल मामलों के चलते न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या ज्यादा है लेकिन लोक अदालत में आपसी समझाइश से मामले सुलझा लिये जाते हैं। इससे न्यायालय का भार भी कम होगा। उन्होंने कहा कि यह न्याय का सस्ता व सुलभ माध्यम है, जहां ना किसी की हार होती है ना किसी की जीत बल्कि आपसी सामंजस्य से सफलता प्राप्त होती है।
480 बैंचों की स्थापना
सिंह ने कहा कि इस बार 480 बैंचों की स्थापना की गई है, जिनमें लगभग 6 लाख मुकदमों की सुनवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गत लोक अदालत में प्रकरणों के निस्तारण में पूरे देश में राजस्थान दूसरे स्थान पर रहा, इस बार हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक मामलों को निस्तारित कर हमारा प्रदेश प्रथम स्थान प्राप्त करे।
इस अवसर पर प्राधिकरण के सदस्य सचिव दिनेश कुमार गुप्ता ने सिंह का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन उप सचिव रविकांत सोनी व स्वाति राव ने किया।
रालसा लगातार कर रहा नवाचार
लिटिगेंट्स की लोक अदालत तक पहुंच सुलभ कराने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं रालसा के कार्यकारी अध्यक्ष एम एम श्रीवास्तव की प्रेरणा से लोक अदालत में रालसा- 22 ऑनलाइन लोक अदालत डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनुप्रयोग कर लोक अदालत को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया था। इसमें सुधार करते हुए इस प्लेटफाॅर्म को और सरल बनाया गया है।
न्याय रो साथी मोबाइल ऐप
इस बार लोक अदालत में प्रकरण रखवाने के लिए न्याय रो साथी मोबाइल ऐप को भी जनसाधारण के लिए सुलभ कराया है। इसके साथ ही डोर स्टेप काउंसलिंग और ऑनलाइन वीडियो काउंसलिंग के माध्यम से लोक अदालत को लिटिगेंट्स के घर और द्वार तक पहुंचाया है।
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