नये संसद भवन का उद्घाटन, सेंगोल यानी राजदण्ड स्थापित किया गया
<p><em>भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह देश के नये संसद भवन का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पूर्व पीएम मोदी ने अधीनम् (संतों) की उपस्थिति में महत्वपूर्व व ऐतिहासिक 'सेंगोल' यानी राजदण्ड को लोकसभा में अध्यक्ष के आसन के बगल में स्थापित किया।</em></p> <blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">पवित्र 'सेंगोल' भारत के न्याय, निष्पक्षता, संप्रभुता और सामर्थ्य का प्रतीक है।<br><br>आदरणीय प्रधानमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a> जी द्वारा आज नए संसद भवन में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पावन 'सेंगोल' की स्थापना भारत की सांस्कृतिक धरोहरों तथा उत्कृष्ट लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सभी देश… <a href="https://t.co/umDDUsXejJ">pic.twitter.com/umDDUsXejJ</a></p>— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/1662665386834415616?ref_src=twsrc%5Etfw">May 28, 2023</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
पीएम मोदी को एक दिन पहले शनिवार 27 मई को तमिलनाडु से आए अधीनम ने इस ऐतिहासिक राजदंड को पीएम मोदी को सौंपा था।
विवादों की सियासत
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने नये संसद के साथ ताबूत का चित्र दिखाकर पूछा कि यह क्या है। इसके अलावा इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी की ओर से कहा गया कि आप मजबूर हैं और कुछ नहीं। संसद देश की है और ताबूत आपका। वर्ष 2024 में जनता आपको ताबूत में ही गाड़ देगी।
ये क्या है? pic.twitter.com/9NF9iSqh4L— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) May 28, 2023
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नये संसद भवन के उद्घाटन का कुछ विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं और एक मंच पर एकत्र हो रहे हैं। इन दलों का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नये संसद भवन का उद्घाटन कराना चाहिए लेकिन जब भाजपा ने इन विपक्षी दलों की बात नहीं मानी तो तीखी और अपमानजनक बयानबाजी शुरू कर दी। शुरुआत जरूर कांग्रेस की ओर से की गयी थी लेकिन बाद में अन्य विपक्षी दल साथ में जुड़ते गये।
सेंगोल के बारे कुछ जानकारियां
सेंगोल यानी राजदण्ड को लोकसभा में अध्यक्ष के आसन के पास में स्थापित किया गया है। सेंगोल तमिल शब्द सेम्मई से बना है। इसका अर्थ होता है- नीतिपरायणता। अब सेंगोल को देश के पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर जाना जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस सेंगोल का एतिहासिक महत्व बताते हुए स्पष्ट किया था कि ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से भारत को हस्तांतरित किए गए सत्ता के प्रतीक ऐतिहासिक ‘सेंगोल’ को नये संसद भवन में स्थापित किया जाएगा। ‘सेंगोल’ अभी प्रयागराज के एक संग्रहालय में रखा गया था।
तमिलनाडु का चोल साम्राज्य भारत का एक प्राचीन साम्राज्य था। तब चोल सम्राट सत्ता का हस्तांतरण सेंगोल सौंपकर करते थे। भगवान शिव का आह्वाहन करते हुए राजा को इसे सौंपा जाता था। नेहरू को राजा गोपालचारी ने इसी परंपरा के बारे में बताया।
इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सेंगोल परंपरा के तहत सत्ता हस्तांतरण की बात को स्वीकार किया और तमिलनाडु से इसे मंगाया गया। सबसे पहले सेंगोल को लॉर्ड माउंट बेटन को ये सेंगोल दिया गया और फिर उनसे हस्तांतरण के तौर पर इसे वापस लेकर नेहरू के आवास ले जाया गया। जहां गंगाजल से सेंगोल का शुद्धिकरण किया गया। उसके बाद मंत्रोच्चारण के साथ नेहरू को इसे सौंप दिया गया।
प्रयागराज म्यूजियम में यह गोल्डन स्टिक पहली मंजिल पर बनाई गई नेहरू गैलरी के प्रवेश द्वार पर बने शोकेस में रखी गई थी। इस गैलरी में पंडित नेहरू के बचपन की तस्वीरों से लेकर उनके घरों के मॉडल ऑटो बॉयोग्राफी और उपहार में मिली हुई तमाम वस्तुएं रखी गईं हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के निर्देश पर यह सेंगोल 6 महीने पहले 4 नवंबर 2022 को प्रयागराज म्यूजियम से दिल्ली के नेशनल म्यूजियम भेज दी गई थी। यह भी दुर्भाग्यपूर्ण ही था कि इस राजदण्ड को नेहरू की घूमने के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली छड़ी बताया गया।
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