रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने की तैयारी..भारत-चीन पर पड़ेगा असर
<p><em><strong>जी-20 और यूरोपीय यूनियन जल्द ही रूसी तेल पर प्राइस कैप की घोषणा कर सकता है। इस पर राष्ट्रपति पुतिन ने सख्त लहजे में कहा है कि इससे ऊर्जा बाजार के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। </strong></em></p>
अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देश जल्द ही रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने का ऐलान करने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की मानें तो रूसी तेल की कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच तय की जा सकती है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूसी तेल पर प्राइस कैप लागू करने के अंतिम चरण में हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि प्राइस कैप की मंजूरी मिलते ही अगले कुछ दिनों में इसे लागू कर दिया जाएगा।
प्राइस कैप बाजार के सिद्धांत के खिलाफः पुतिन
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूसी तेल पर पश्चिमी देशों की ओर से लाया गया प्राइस कैप बाजार के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर हो सकता है।
यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस कई आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. इसमें से अधिकतर प्रतिबंध अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने लगाए हैं। प्राइस कैप इसी आर्थिक प्रतिबंध का हिस्सा है। इसके तहत पांच दिसंबर से रूसी तेल की कीमत का निर्धारण जी-20 और यूरोपीय यूनियन करेंगे। अभी रूस अपनी कीमतों पर तेल बेच रहा है।
प्राइस कैप क्यों?
प्राइस कैप का मुख्य उद्देश्य रूस की आय को कम करना है. पश्चिम की ओर से रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध का शुरू से ही मकसद रूस की आय के स्रोत को कम करना है ताकि यूक्रेन से युद्ध में इस्तेमाल किए जा रहे रूसी फंड में कमी आए। सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन रूसी कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच कैपिंग पर विचार कर रहा है यानी रूस इससे सस्ता या महंगा तेल नहीं बेच पाएगा। प्राइस कैप के लागू हो जाने के बाद अगर कोई भी कंपनियां इसके अनुकूल तेल नहीं खरीदती हैं तो उस तेल के लिए कंपनियों को शिपिंग, बीमा और वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी।
भारत पर नहीं होगा ज्यादा असर
प्राइस कैप को लेकर पूछे गए सवाल पर भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि हम किसी भी तरह से चिंतित नहीं हैं। जब प्राइस कैप लागू होगा देखा जाएगा। अगर प्राइस कैप 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल रहता है, जैसी कि संभावनाएं जताई जा रही हैं तो इसका ज्यादा असर भारत पर नहीं पड़ेगा। दरअसल, पहले ही भारत इसी दाम के आसपास रूस से तेल खरीद रहा है।
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