‘ऑटोपायलट’ के भरोसे विमान, हो सकता है बेहद खतरनाक
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इथियोपिया की राजधानी में हाल ही इथियोपियन एयरलाइंस के एक विमान के पायलट 37000 की फीट की ऊंचाई पर सो गए थे। इस विमान ने सूडान के खार्तूम से आदिस अबाबा के लिए उड़ान भरी थी। ये पायलट इतनी गहरी नींद में थे कि उन्हें एयर ट्रैफिक कंट्रोल से आ रही चेतावनी को भी अनसुना कर दिया। इस कारण विमान को उतरने में 25 मिनट का अतिरिक्त समय लग गया। एयर सेफ्टी रेगुलेटरी ने इस घटना को काफी गंभीर बताया और जांच शुरू कर दी।
क्या होता है ऑटोपायलट
ऑटोपायलट ऑन होने पर विमान को गंतव्य पर पहुंचाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से कंप्यूटर संभालता है। जब विमान अपने निर्धारित एयरपोर्ट के करीब पहुंचता है, तब ऑटोपायलट को डिस्कनेक्ट करना होता है। डिस्कनेक्ट होते ही विमान का पूरा कंट्रोल दोबारा पायलट के हाथ में आ जाता है। अगर निर्धारित समय पर एयरपोर्ट तक पहुंचने के बाद भी ऑटोपायलट मोड ऑफ नहीं किया जाता, तब कॉकपिट में एक हूटर तेज आवाज में बजने लगता है। यह चेतावनी होती है कि आप अपने गंतव्य को पार कर चुके हैं।
कैसे काम करता है ऑटोपायलट
असली पायलट को जब आराम करना होता है तो ऑटोपायलट का सहारा लिया जाता है। ऑटोपायलट ऐसा कोई रोबोट नहीं है जो पायलट की सीट पर बैठा हो और बटन दबाता हो। यह सिर्फ एक फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम है, जो पायलट को लगातार हाथों से कंट्रोल के बिना एक हवाई जहाज को उड़ाने की अनुमति देता है। एक मॉर्डन फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में मुख्य रूप से तीन पार्ट होते हैं। पहला- एक फ्लाइट मॉनिटरिंग कंप्यूटर, दूसरा- कई हाई स्पीड के प्रोसेसर और तीसरा- विमान के कई हिस्सों पर लगाए गए सेंसरों की एक सीरीज। सेंसर पूरे विमान से डेटा एकत्र करते हैं और उन्हें प्रोसेसर को भेजते हैं, जो बदले में कंप्यूटर को बताते हैं कि क्या करना है।
ऑटोपायलट की सफलता पायलट के ज्ञान पर निर्भर करती है। अगर उन्हें गलत तरीके से प्रोग्राम किया जाता है तो वे आपको मौत की दहलीज तक लेकर जा सकते हैं। अगर उसके पास गलत इनपुट मिलता है, तो वह उसे भी स्वीकार कर लेगा। जिसका मतलब यह है कि वह आपको मार सकता है।
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