आते ही छा गया डिजिटल रुपया... 275 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन, क्या-क्या खरीदा जा सकेगा?
<p><em><strong>पहले दिन कई बैंकों ने इस वर्चुअल मनी का इस्तेमाल करते हुए सरकारी बॉन्ड से जुड़े करीब 50 ट्रांजैक्शन किए। इनकी कुल वैल्यू 275 करोड़ रुपये है।</strong></em></p>
आरबीआई की डिजिटल करेंसी मंगलवार को लाॅन्च हो गई। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल रुपी (होलसेल सेगमेंट) का पहला पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च कर दिया। पहले दिन कई बैंकों ने इस वर्चुअल मनी का इस्तेमाल करते हुए सरकारी बॉन्ड से जुड़े करीब 50 ट्रांजैक्शन किए। इनकी कुल वैल्यू 275 करोड़ रुपये है।
डिजिटल रुपया क्या है?
दरअसल रुपी या डिजिटल रुपया भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए जाने वाले करेंसी नोटों का ही डिजिटल स्वरूप है। ये करेंसी नोटों की तरह ही पूरी तरह वैध और मान्य होगा, जिसका इस्तेमाल सभी तरह के लेन-देन के लिए किया जा सकेगा। आरबीआई ने डिजिटल करेंसी को दो श्रेणियों- सीबीडीसी डबल्यू और सीबीडीसी आर में बांटा है। सीबीडीसी डबल्यू मतलब होलसेल करेंसी और सीबीडीसी आर मतलब रिटेल करेंसी। डिजिटल इकोनॉमी विकसित करने की दिशा में इसको एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ये कैसा दिखता है?
यह नोट या सिक्के की तरह दिखेगा नहीं, यह मोबाइल फोन, बैंक अकाउंट या डिजिटल वॉलेट में नकदी की तरह रहेगा और आप जब चाहें तब इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। यह बिट क्वाइन जैसी एक आभासी मुद्रा है, फर्क यही है कि इसे सरकार ने जारी किया है इसलिए ये वैध कहा जा रहा है। अवैध तो बिट क्वाइन भी नहीं रहा किंतु सरकार उसके लेनदेन पर भारी-भरकम टैक्स वसूलती है।
इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?
फिलहाल डिजिटल रुपये का इस्तेमाल बैंकों के बीच होने वाले बड़े लेनदेन के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा पायलट प्रोजेक्ट में कई और संस्थानों को इसके इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। डिजिटल रुपये को भविष्य में विदेशों में भुगतान के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेेगा। इसकी वैल्यू कागजी नोट के बराबर ही होगी। ग्राहक इसको देकर करेंसी नोट भी हासिल कर सकते है।
क्या खुदरा सामान खरीद जा सकते हैं?
अभी यह संभव नहीं क्योंकि अभी सिर्फ बड़े संस्थान इसका इस्तेमाल करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट में फिलहाल नौ बैंक जुड़े हुए हैं। जैेसे-जैसे इसका चलन बढ़ेगा तो किराना सामान भी इसी से खरीदा जा सकेगा।
What's Your Reaction?