पृथ्वी से दोगुना आकार के इस ग्रह पर वैज्ञानिकों को मिला ‘पानी’
<p>वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से दूर एक ग्रह पर पानी की खोज की है। खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप का उपयोग कर धरती से 97 प्रकाश वर्ष दूर एक छोटे धधकते-गर्म एक्सोप्लैनेट के वातावरण में पानी के अणुओं का पता लगाया है। नए अध्ययन में कहा गया है कि जिस ग्रह पर पानी के अणु मिले है, वह ग्रह पृथ्वी से दोगुने आकार का है।</p>
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से दूर एक ग्रह पर पानी की खोज की है। खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप का उपयोग कर धरती से 97 प्रकाश वर्ष दूर एक छोटे, धधकते-गर्म एक्सोप्लैनेट के वातावरण में पानी के अणुओं का पता लगाया है। हबल साइट डॉट ओआरजी ने यह जानकारी दी है।
पानी के अणु मिलने पर वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
नए अध्ययन में कहा गया है कि, जिस ग्रह पर पानी के अणु मिले है, उसका आकार पृथ्वी से दोगुना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सबसे छोटा एक्सोप्लैनेट है, जिसके वायुमंडल में पानी का वाष्प पाया गया है। हबल साइट डॉट ओआरजी ने अपने एक बयान में कहा कि एक्सोप्लैनेट पर जल वाष्प के प्रमाण मिलने से खगोलविद आश्चर्यचकित हो गए हैं।
ग्रह के चारों ओर पानी होने की संभावना
वैज्ञानिकों का कहना है कि 9827डी के चारों ओर पानी होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह ग्रह हमारी आकाशगंगा में कहीं और संभावित जल-समृद्ध दुनिया का एक उदाहरण हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ग्रह शुक्र ग्रह जितना गर्म है और इसका तापमान 800 डिग्री फाॅरेनहाइट यानी करीब 426 डिग्री सेल्सियस है, जिसके कारण यहां भाप का पता चला है।
वैज्ञानिकों ने इस खोज को बताया एतिहासिक
जर्मनी के हीडलबर्ग में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी की सह-प्रमुख अन्वेषक लौरा क्रेडबर्ग ने कहा कि इतने छोटे ग्रह पर पानी का मिलना एक ऐतिहासिक खोज है, जो कि वास्तव में पृथ्वी जैसी दुनिया को चित्रित करने के पहले से कहीं अधिक करीब लाता है। उन्होंने कहा कि अभी यह बताना जल्दबाजी होगा कि क्या हबल ने स्पेक्ट्रोस्कोपी से फूले हुए हाइड्रोजन से भरे वातावरण में थोड़ी मात्रा में पानी का वाष्प को मापा था, या ग्रह का वायुमंडल ज्यादातर पानी से बना है।
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