लाजवाब...! देश की पहली वाटर मेट्रो, 15 मिनट में फुल चार्ज, 100 पैसेंजर्स की क्षमता
<p><em><strong>कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की बनाई वाटर मेट्रो बोट्स कोच्चि और उसके आसपास के 10 द्वीपों को जोड़ेगी। यह कटमैन फैरी डिजाइन्ड बोट है। इसकी लंबाई 24.8 मीटर है। इसमें एक बार में 100 पैसेंजर यात्रा कर सकते हैं। बोट के इंटीरियर में बड़ी खिड़कियां दी गई हैं ताकि पैसेंजर सफर के दौरान बाहर के एग्जॉटिक व्यू का भी आनंद ले सकें। </strong></em></p>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केरल के कोच्चि में भारत की पहली वाटर मेट्रो की शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट की कॉस्ट 1,137 करोड़ रुपए है। अभी इस प्रोजेक्ट के पहले फेज में 8 बोट से शुरुआत की गई है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद 78 फास्ट इलेक्ट्रिकली प्रोपेल्ड हाइब्रिड बोट चलाई जाएंगीं। इससे पॉल्यूशन कम करने में मदद मिलेगी और कोच्चि झील के किनारे बसे परिवारों का मेन मार्केट तक पहुंचना आसान हो जाएगा। वाटर मेट्रो से द्वीप पर रहने वाले एक लाख से ज्यादा लोगों को फायदा होगा।
चार रेस्क्यू बोट भी बेड़े में
पैसेंजर सर्विस के लिए कुल 78 इकोफ्रैंडली बोट चलेंगीं। इनमें से 23 बोट 100 यात्रियों को ले जा सकती हैं, बाकी 55 बोट 50 यात्रियों को कैरी कर सकती हैं। इन बोट्स के अलावा इमरजेंसी और मेंटेनेंस की स्थिति में मेन फ्लीट को सपोर्ट करने के लिए चार रेस्क्यू बोट भी हैं।
फ्लोटिंग जेटी में लगाए सुपर-चार्जर
मेट्रो में लिथियम टाइटनेट ऑक्साइड बैटरी लगी है। बैटरी की कैपेसिटी 122 एमएच है। ये बैटरी नई टेक्नोलॉजी की है। इसे 10 से 15 मिनट में चार्ज किया जा सकता है। चुनिंदा स्थानों पर फ्लोटिंग जेटी में सुपर-चार्जर लगाए गए हैं। बोट में जनरेटर बैक-अप भी है।
हाई स्पीड पर भी कम लहरें
ये बोट्स पूरी तरह से एयर-कंडीशन्ड हैं। इनकी बड़ी खिड़कियों से पैसेंजर बाहर के नजारें देख सकते हैं। इंटीरियर को भी मेट्रो ट्रैवलर्स को बेहतरीन सर्विस देने के लिए डिजाइन किया गया है। बोट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हाई स्पीड पर भी कम लहरें पैदा हों।
सीसीटीवी सिस्टम से बेहतर निगरानी
वायटिला हब के ऑपरेटिंग कंट्रोल सेंटर में लगे ऑटोमेटिक बोट लोकेशन सिस्टम से बोट की पोजिशन की लगातार निगरानी की जाएगी। सीसीटीवी सिस्टम बेहतर सेफ्टी के लिए रिमोट लोकेशन से नाव की गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है।
बोट टर्मिनल
साइज और कैपेसिटी के हिसाब से तीन तरह के बोट टर्मिनल हैं। मेजर, इंटरमीडिएट और माइनर टर्मिनल। पीक ऑवर ट्रैफिक के आधार पर टर्मिनलों को प्लान किया गया है। सभी बोट टर्मिनलों को पेड और नॉन-पेड एरिया में डिवाइड किया गया है। टिकट फैसिलिटी, टिकट वेंडिंग मशीन, स्टेशन कंट्रोल अनपेड एरिया में हैं। पेड एरिया में वेटिंग एरिया, टॉयलेट आदि की व्यवस्था है। सभी टर्मिनलों पर ऑटोमेटेड फेयर कलेक्शन और यात्रियों की गिनती के लिए टर्नस्टाइल सिस्टम की फैसिलिटी है।
ये केरल का ड्रीम प्रोजेक्ट
इसे केरल का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जा रहा है। केरल सरकार और जर्मन फर्म ने इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाया है। पहले फेज में वाटर मेट्रो हाईकोर्ट-वाइपिन टर्मिनल और वायटीला-कक्कनाड टर्मिनल से चलेगी। केरल के मुख्यमंत्री के अनुसार, पैसेंजर ट्रैफिक में फंसे बिना 20 मिनट से भी कम समय में हाईकोर्ट टर्मिनल से वायपिन टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे। जबकि वॉटर मेट्रो के जरिए वायटीला से 25 मिनट में कक्कनाड पहुंचा जा सकता है।
कोच्चि वाटर मेट्रो बेहद सस्ती
बोट जर्नी के लिए न्यूनतम टिकट की कीमत 20 रुपए, जबकि अधिकतम कीमत 40 रुपए है। रेगुलर पैसेंजर्स के लिए वीकली और मंथली पास अवेलेबल है। वीकली पास 180 रुपए का है। इससे 12 बार यात्रा कर सकते हैं। 50 ट्रिप के साथ 30 दिनों के लिए किराया 600 रुपए रहेगा, वहीं 90 दिनों के लिए 150 ट्रिप वाला पास 1500 रुपए का बनेगा। कोच्चि वन कार्ड का उपयोग कर कोच्चि मेट्रो रेल और कोच्चि वाटर मेट्रो में यात्रा की जा सकती हैं।
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