ये क्या कांड हो गया चालबाज चीन के साथ! 20 साल में पहली बार हुआ ऐसा..!
<p><em>करीब दो दशक अमेरिका को एक्सपोर्ट के मामले में चीन की तूती बोलती थी लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। चीन अब इस रेस में पिछड़ गया है। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक मेक्सिको अब अमेरिका का टॉप एक्सपोर्टर बन गया है।</em></p>
पिछले दो दशक में अमेरिका के आयात में चीन पहले नंबर पर रहा। लेकिन 2023 में यह स्थिति बदल गई। बीते साल अमेरिका ने चीन से बजाय मेक्सिको से सबसे ज्यादा सामान मंगाया। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक मेक्सिको अब अमेरिका का टॉप एक्सपोर्टर बन गया है। अमेरिका ने पिछले साल मेक्सिको से 475.6 अरब डॉलर का सामान आयात किया जो 2022 की तुलना में पांच फीसदी अधिक है।
इस दौरान चीन ने अमेरिका को 427.2 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया जो 2022 की तुलना में 20 फीसदी कम है। इस कारण अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट घटकर 773.4 अरब डॉलर रह गया है जो 2022 की तुलना में 19 फीसदी कम है। यह 2009 के बाद अमेरिका के ट्रेड डेफिसिट में सबसे बड़ी सालाना गिरावट है।
पिछले कुछ समय से चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में काफी तल्खी आई है। दोनों देशों ने एकदूसरे की कई कंपनियों पर पाबंदी लगा रखी है। अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। खासकर सेमीकंडक्टर चिप्स को लेकर दोनों के बीच ठनी हुई है। इसे भविष्य का ऑइल कहा जा रहा है। अमेरिका और चीन दोनों इसकी सप्लाई चेन पर इसके लिए तैयार नहीं है।
चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है लेकिन पिछले कुछ समय से वह कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। बेरोजगारी चरम पर है, विदेशी निवेशक मुंह मोड़ रहे हैं, शेयर बाजार लगातार रसातल में जा रहा है और लोग पैसे खर्च करने के बजाय बचाने में लगे हैं।
डिफ्लेशन में फंसी इकॉनमी
इस बीच देश में उपभोक्ता कीमतों में भारी गिरावट आई है। जनवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.8 फीसदी की गिरावट आई। यह सितंबर 2009 के बाद इसमें आई सबसे बड़ी गिरावट है। लगातार चैथे महीने इसमें गिरावट आई है। देश की इकॉनमी पहले से ही डिफ्लेशन की स्थिति में थी जो अब और गहरा गई है। वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में गिरावट को डिफ्लेशन कहते हैं। आमतौर पर इकॉनमी में फंड की सप्लाई और क्रेडिट में गिरावट के कारण ऐसी स्थिति पैदा होती है। इससे चीन की इकॉनमी में जापान की तरह ठहराव आने की आशंका जताई जा रही है। 1990 के दशक में जापान की इकॉनमी में ठहराव आ गया था। यही वजह है कि चीन में डिफ्लेशन पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है।
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