‘अतीत की गलतियाँ’: किरेन रिजिजू ने 90 के दशक के 'चाणक्य' सीरियल का सहारा लेकर उठाया नागरिकता का मुद्दा, बिहार वोटर लिस्ट विवाद पर कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर छिड़े विवाद के बीच कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध 90 के दशक के धारावाहिक ‘चाणक्य’ का एक वीडियो साझा किया, जिसमें मौर्य साम्राज्य ..
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर छिड़े विवाद के बीच कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध 90 के दशक के धारावाहिक ‘चाणक्य’ का एक वीडियो साझा किया, जिसमें मौर्य साम्राज्य की राजसभा में शरणार्थियों को शरण देने पर तीखी बहस दिखाई गई है।
रिजिजू ने वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, "कांग्रेस पार्टी द्वारा अवैध घुसपैठियों का समर्थन देखकर यह दृश्य याद आ गया। ये वे गलतियाँ हैं जो 2000 साल पहले की गई थीं। हम अवैध प्रवासियों को अपनी मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दे सकते।"
अवैध घुसपैठियों को कांग्रेस पार्टी का समर्थन देखकर मुझे यह दृश्य याद आ रहा है।
Mistakes committed more than 2000 years back. We can't allow illegal migrants in our voter list. pic.twitter.com/Rx4ikAXQkb — Kiren Rijiju (@KirenRijiju) July 13, 2025
उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की जब बिहार में चल रही मतदाता सूची की विशेष समीक्षा (SIR) को लेकर विपक्ष खासकर कांग्रेस चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साध रही है।
क्या था वीडियो में?
वीडियो में चंद्रगुप्त मौर्य की सभा में एक मंत्री कहता है, "शरण देना या न देना आपके मानवीय दृष्टिकोण पर निर्भर करता है,"
जबकि अन्य दरबारी चेतावनी देते हैं, "कल यही शरणार्थी तक्षशिला की भूमि पर अधिकार का दावा करेंगे।" यह बहस बिहार की धरती पर आधारित मौर्य साम्राज्य की पृष्ठभूमि में दिखाई गई है — और वर्तमान में बिहार ही इस वोटर लिस्ट विवाद का केंद्र बन गया है।
राजनीतिक प्रतीकों का उपयोग
भाजपा ने हमेशा इतिहास और संस्कृति के प्रतीकों का राजनीतिक संदर्भों में उपयोग किया है। ‘चाणक्य’ धारावाहिक की यह क्लिप भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
पार्टी राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े मसलों में अवैध प्रवास को अहम मुद्दा मानती रही है, खासकर बांग्लादेशी और म्यांमारी घुसपैठियों को लेकर।
CAA, घुसपैठ और विपक्ष पर आरोप
2019 में भाजपा सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित किया, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता पाने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया।
इस कानून को लेकर देशभर में विरोध हुआ था। आलोचकों ने इसे धार्मिक भेदभाव पर आधारित और संविधान विरोधी बताया।
पश्चिम बंगाल में भाजपा बार-बार ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाती रही है कि वह अवैध प्रवासियों को बढ़ावा दे रही है और सीमा सुरक्षा को जानबूझकर कमजोर कर रही है।
इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया था कि ममता सरकार घुसपैठियों पर रहम खा रही है और बॉर्डर फेंसिंग को जानबूझकर रोक रही है — जिससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
भारत की शरणार्थी नीति और वैश्विक स्थिति
गौरतलब है कि भारत 1951 के संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन और 1967 प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, और देश में कोई राष्ट्रीय शरणार्थी कानून भी नहीं है। इसलिए, शरणार्थियों को लेकर फैसले पूरी तरह सरकारी विवेक पर आधारित होते हैं।
दूसरी ओर, भारत अमेरिका जैसे देशों की प्रवासी-विरोधी नीतियों से भी प्रभावित हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों में सख्ती से भारत को अरबों डॉलर के प्रेषण (remittances) के नुकसान की आशंका जताई गई थी।
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