‘जो उसको पसंद है, मुझे…’: साइना नेहवाल ने पारुपल्ली कश्यप से अलगाव और दोबारा कोशिश करने के पीछे की वजह बताई; बदलती पहचानें कैसे रिश्तों की परीक्षा लेती हैं
बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने हाल ही में खुलासा किया कि सात साल की शादी के बाद उन्होंने पारुपल्ली कश्यप से अलग होने का फैसला क्यों किया था और फिर बाद में दोबारा साथ आने का निर्णय क्यों लिया..
नयी दिल्ली। बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने हाल ही में खुलासा किया कि सात साल की शादी के बाद उन्होंने पारुपल्ली कश्यप से अलग होने का फैसला क्यों किया था और फिर बाद में दोबारा साथ आने का निर्णय क्यों लिया।
फ़िल्मीग्यान को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने उस कठिन दौर को याद करते हुए कहा, “मेरा मानना है कि वो निर्णय बहुत मुश्किल था, आसान नहीं था, क्योंकि कभी-कभी बैडमिंटन के बाद हम दोनों की पसंद अलग हो गई, दोनों का माइंडसेट बदल गया।”
साइना ने बताया कि करियर ट्रांज़िशन ने भी रिश्ते में तनाव बढ़ाया। पारुपल्ली कश्यप के रिटायर होकर कोच बनने के बाद घर में समीकरण बदल गए। उन्होंने कहा, “ऐसा होता है क्योंकि इतने साल कोर्ट में बिताए हैं और अचानक आप खेल छोड़कर कोच बन जाते हैं।”
उन्होंने साफ़ कहा कि पसंद-नापसंद में फर्क बढ़ने से दूरियां पैदा हुईं, “कश्यप अब कोच हैं, हमें लगा शायद कुछ अलग चल रहा है। उनको जो पसंद है, मुझे पसंद नहीं, और हमें लगने लगा कि चीज़ें ठीक नहीं चल रहीं।”
समय बीतने के साथ झगड़े बढ़े और हालात मुश्किल होते गए। साइना बोलीं,“तो उसकी वजह से बीच में लड़ाइयाँ होने लगीं। लगा कि सेट नहीं हो रहा है, तो हम अलग हो जाते हैं।”
क्या करियर बदलने से रिश्ते में दूरी आना आम है?
लाइसेंस्ड रिहैबिलिटेशन काउंसलर और साइकोथेरापिस्ट सोनल खंगारोट (द आंसर रूम) बताती हैं कि प्रोफेशनल आइडेंटिटी बदलने पर कपल्स का एक-दूसरे से दूर होना काफी कॉमन है।
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उनके अनुसार, “लोग बदलते हैं, और उनके साथ उनकी ज़रूरतें, मूल्य और खुशी की परिभाषाएँ भी बदलती हैं। करियर बदलाव से व्यक्ति की स्व-पहचान, प्राथमिकताएँ और भावनात्मक उपलब्धता प्रभावित होती है। रिश्तों को चलता रहने के लिए लगातार ऐलाइनमेंट ज़रूरी है।”
वह कहती हैं कि दूर होने के शुरुआती संकेतों में शामिल हैं..
- लक्ष्य अलग हो जाना
- सपोर्ट न मिलना
- बातचीत कम होना
- ऐसा महसूस होना कि दोनों अपनी-अपनी अलग दुनिया में जी रहे हैं
अस्थायी तनाव बनाम वास्तविक असंगति
अक्सर कपल्स अस्थायी तनाव को असंगति समझ बैठते हैं। दबाव वाले समय में लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, खुद में सिमट जाते हैं, या कुछ पुरानी पसंदों में उलझे रहते हैं।
ऐसे में छोटी-छोटी बातें भी बड़ी लगने लगती हैं। यह समय के साथ सामान्य हो जाता है लेकिन गहरी असंगति तब दिखाई देती है जब..
- लगातार वही झगड़े होते रहें
- कोर वैल्यू पर टकराव हो
- खुद को न समझा हुआ महसूस करना
- हमेशा भावनात्मक थकान में जीना पड़े
खंगारोट बताती हैं, “फर्क तभी समझ आता है जब तनाव कम होने पर रिश्ता सामान्य हो जाए… या फिर दूरी ही नई सामान्य स्थिति बन जाए।”
रिश्ते को फिर से बनाने के तरीके
खंगारोट के अनुसार, जब कपल्स दोबारा कोशिश करना चाहते हैं, तो प्रोफेशनल मदद लेना बेहद जरूरी हो जाता है। एक प्रशिक्षित मैरिज थेरेपिस्ट रिश्ते की पैटर्न्स की पहचान कर सकता है और सही थेरेपी फ्रेमवर्क चुन सकता है जो इंटरनेट या AI जैसी जगहों पर संभव नहीं।
वे बताती हैं कि ये थेरेपी मॉडल अच्छे परिणाम देते हैं..
- Emotion-Focused Therapy (EFT)
- The Gottman Method
- Imago Dialogue
इनसे कपल्स अपने अनमेट नीड्स समझते हैं, संवाद बेहतर बनाते हैं और एक सुरक्षित रिश्ता दोबारा खड़ा कर पाते हैं।
खंगारोट कहती हैं, “ये टूल तभी काम करते हैं जब दोनों पार्टनर ईमानदारी से शामिल हों और विशेषज्ञ सही गति से प्रक्रिया को गाइड करे। तभी पुराने पैटर्न दोहराए बिना नया, स्वस्थ रिश्ता संभव है।”
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